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Sunrise in My Pocket
Dance

Sunrise in My Pocket

Simi TiwariSimi Tiwari
0 likes1 plays5:05
Style: Energetic, female vocal, happy
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Lyrics

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सुबह हुई, सूरज मुस्काया,

नीला-नीला आसमान सजाया।

तभी सुनाई दी एक तान,

“टुन-टुन!” आई रंगीन ट्रेन!

टुन-टुन, टुन-टुन, ट्रेन चली,

बादलों की राह चली।

हाथ हिलाओ, मुस्कुराओ,

आओ बच्चों, साथ में आओ!

टुन-टुन, टुन-टुन, ऊपर जाएँ,

बादल छूकर नीचे आएँ।

हँसते-गाते, झूमते जाएँ,

सपनों की दुनिया घूमते जाएँ!

बादल बोले — “आओ-आओ!”

बच्चे बोले — “हमें भी लाओ!”

छोटी-सी सीटी, प्यारी-सी धुन,

चल पड़ी ट्रेन — छुक-छुक-छुक!

एक बच्चा आगे आया,

खिड़की से उसने हाथ हिलाया।

दूसरा बोला — “देखो भाई!”

ऊपर कितनी रुई उड़ आई!

टुन-टुन, टुन-टुन, ट्रेन चली,

बादलों की राह चली।

हाथ हिलाओ, मुस्कुराओ,

आओ बच्चों, साथ में आओ!

आगे आई रंगों वाली,

लंबी-चौड़ी सुरंग निराली।

लाल चमका, पीला दमका,

नीला बोला — “मुझको देखो!”

हरा हँसा और बैंगनी झूमा,

सात रंगों ने रास्ता चूमा।

ट्रेन गई जब बीच से होकर,

बच्चे बोले — “वाह रे! वाह!”

लाल-पीला, नीला-हरा,

रंगों से भर गया आसमां सारा।

ऊपर देखो, नीचे देखो,

रंग-बिरंगा सपना देखो!

फुर्र-फुर्र करती तितली आई,

पीली, नीली, लाल रंग लाई।

एक बैठी ट्रेन की खिड़की,

एक उड़ती आगे-आगे।

बच्चे बोले — “रुको ज़रा!”

तितली बोली — “आओ ना!”

पंख हिलाओ, हाथ घुमाओ,

तितली जैसे उड़ते जाओ!

फुर्र-फुर्र, पंख हिलाएँ,

गोल-गोल हम घूमते जाएँ।

ऊपर हाथ और नीचे पैर,

मस्ती होगी बारंबार!

शाम हुई तो आसमान में,

चमके तारे झिलमिल-झिलमिल।

दूर दिखाई दिया शहर,

तारों वाला सुंदर शहर।

छोटे तारे, बड़े सितारे,

चमक रहे थे प्यारे-प्यारे।

एक सितारा पास में आया,

बच्चों को उसने गीत सुनाया।

टिम-टिम, टिम-टिम, तारे चमके,

नीले गगन में दीपक दमके।

एक इधर और एक उधर,

तारों से भर गया नगर!

टुन-टुन, टुन-टुन, ट्रेन चली,

तारों वाली राह चली।

हाथ हिलाओ, मुस्कुराओ,

आओ बच्चों, साथ में आओ!

चाँद मिला मुस्काता हुआ,

चाँदी जैसी रोशनी लाया।

बोला — “मेरे बगीचे आओ,

चाँदनी के फूल खिलाओ!”

चाँद के फूल चमक रहे थे,

ओस के मोती दमक रहे थे।

बच्चे धीरे-धीरे आए,

चाँद के संग गीत सुनाए।

चाँद हँसा तो रात हँसी,

फूल खिले और बात बनी।

धीरे-धीरे झूमो सारे,

चाँद के बगीचे में प्यारे!

फिर आई सुनहरी किरण,

सूरज बोला — “जागो बच्चों!”

सोने जैसी धूप बिछी थी,

धरती कितनी प्यारी दिखी थी।

पंछी बोले — “चूँ-चूँ-चूँ!”

बच्चे बोले — “झूमो-झूम!”

सूरज ऊपर, ट्रेन नीचे,

सबके चेहरे चमके मीठे।

ऊपर हाथ, नीचे पैर,

घूमो जैसे गोल सितार!

एक कदम आगे, एक कदम पीछे,

हँसते जाएँ सबसे नीचे!

अब घर जाने की थी बारी,

यात्रा लगती थी प्यारी।

बादल बोले — “फिर आना!”

तारे बोले — “फिर मुस्काना!”

इंद्रधनुष ने हाथ हि�

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