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Aaai giri Nandini
Instrumental

Aaai giri Nandini

Dnyaneshwar GoleDnyaneshwar Gole
0 likes1 plays4:56
Style: indian classical, sitar, tabla, tanpura, raaga, meditative, traditional
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॥ श्रीमहिषासुरमर्दिनिस्तोत्रम् ॥

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिक्रिते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ एक ॥

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते

त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि कल्मषमोषिणि घोररते ।

दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ दो ॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते

शिखरिशिरोमणितुङ्गहिमालयश्रिङ्गनिजालयमध्यगते ।

मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ तीन ॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते

रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड म्रिगाधिपते ।

निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ चार ॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभ्रिते

चतुरविचार धुरीणमहाशिवदूतक्रिते प्रमथाधिपते ।

दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदूतक्रिते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ पांच ॥

अयि शरणागत वैरिवधूवर वीरवराभयदायकरे

त्रिभुवनमस्तक शूलविरोधि शिरोधिक्रितामल शूलकरे ।

दुमिदुमितामर दुन्दुभिनाद मुहूर्तितमोहकरे

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ छह ॥

अयि निजहुङ्क्रितिमात्र निराक्रित धूम्रविलोचन धूम्रशते

समरविशोषित शोणितबीजे समुद्ध्रितशोणितबीज लते ।

शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूतपिशाचरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ सात ॥

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके

कनकपिशङ्ग प्रिषत्कनिषङ्गरसद्भटश्रिङ्ग हतावटुके ।

क्रितचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बटुरङ्ग रटरटुके

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ आठ ॥

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