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Quiet Dawn
Acoustic

Quiet Dawn

Sanskrati MehtaSanskrati Mehta
0 likes1 plays4:21
Style: female vocal, peaceful
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दादी बनी परदादी, इससे है बड़ी क्या बात,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

इनके ही कारण है ये बाग-बगीचा,

चार पीढ़ियों को अपने हाथों से सींचा।

आओ सब मिल करके करते हैं इन्हें प्रणाम,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

सीता देवी पारख जी, परिवार की हैं शान,

इनसे ही रोशन हुआ है आज ये सारा जहान।

प्यार और संस्कारों से सजाया घर-संसार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

सबसे बड़े अशोक-अनीता, माँ का बने सहारा,

सुख-दुःख में हर पल इन्होंने, साथ दिया है प्यारा।

माँ के चरणों में आज लुटाएँ अपना सारा प्यार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

मनोज-अंजू ने रिश्तों को प्यार से है सींचा,

माँ के दिए संस्कारों से अपना जीवन खींचा।

माँ का आशीष बना रहे, खुशियाँ मिलें अपार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

महेन्द्र-मुक्ता ने घर-आँगन में खुशियाँ हैं सजाईं,

माँ की सेवा कर जीवन भर ढेरों दुआएँ पाईं।

माँ के आँचल तले बना रहे यूँ ही इनका संसार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

बेटी आशा माँ के दिल का प्यारा सा अरमान,

मायके की हर याद में बसती माँ की मुस्कान।

बेटी का ये प्यार रहे यूँ जन्मों-जन्म बरकरार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

अंजू-राजेन्द्र जी लेकर आए खुशियों की सौगात,

माँ से जुड़ी रहे हमेशा दिल से दिल की बात।

बेटी-दामाद का बना रहे माँ से ऐसा प्यार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

अनीता-राजकुमार जी का माँ से रिश्ता प्यारा,

माँ की दुआओं ने जीवन में हर पल इन्हें सँवारा।

हँसता-खिलता रहे सदा इनका भी घर-संसार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

फिर अगली पीढ़ी आई, बगिया और सजाई,

दादी की सीख और ममता सबने दिल में बसाई।

अनीश-जया के संग महके रिश्तों का ये प्यार,

आशीष-संस्क्रिति से खिलता रहे सारा परिवार।

ओजस-ध्वनि ने भी इसमें खुशियों के रंग भरे,

दादी के आशीषों से सबके सपने सदा सँवरे।

अदिति, मेहुल, म्रिदुल, चिक्की हैं घर की शान,

हर बच्चे में दिखती दादी के संस्कारों की पहचान।

पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ता जाए आपस का ये प्यार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार,

सोने की सीढ़ी पर स्वागत है बारंबार।

आरवी और नव्या की मुस्कानों से आई बहार,

चौथी पीढ़ी से और भी खिल उठा परिवार।

वियान और कल्प के नन्हे कदम आज हैं तैयार,

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