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Style: Soft youthful female-led Hanuman Chalisa, gentle children's chorus, soulful and joyful Indian devotional vibe. Bansuri, tanpura, dholak, tabla, manjira, soft claps and temple bells. Slow peaceful opening Doha, clear 3–4 sec instrumental pause, then lively rhythmic Chalisa at 108–112 BPM with natural verse breaks and call-response. 4–5 sec instrumental pause before the final Doha, which returns to a calm soulful mood. Positive, magical, warm children's animation atmosphere. Clear Hindi vocals, one continuous composition. No deep male voice, no slow monotonous bhajan, no EDM., female vocal, soft vocals

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श्री हनुमान चालीसा Opening Doha श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ Verse 1 जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ Verse 2 रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ Verse 3 महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ Verse 4 कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥ Verse 5 हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ Verse 6 शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ Verse 7 विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ Verse 8 प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ Verse 9 सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ Verse 10 भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ Verse 11 लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ Verse 12 रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ Verse 13 सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ Verse 14 सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ Verse 15 जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ Verse 16 तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ Verse 17 तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ Verse 18 जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ Verse 19 प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥ Verse 20 दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ Verse 21 राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ Verse 22 सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ Verse 23 आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ Verse 24 भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ Verse 25 नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ Verse 26 संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ Verse 27 सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ Verse 28 और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥ Verse 29 चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ Verse 30 साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ Verse 31 अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ Verse 32 राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ Verse 33 तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ Verse 34 अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ Verse 35 और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ Verse 36 संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ Verse 37 जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ Verse 38 जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ Verse 39 जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ Verse 40 तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ Closing Doha पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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