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Midnight Velvet Confessions
Neo-Soul

Midnight Velvet Confessions

G
G- S
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Style: smooth jazz, saxophone, piano, soft drums, 100 bpm, relaxing, sophisticated, Melodic, male vocal, rap, soft vocals, auto-tune, guitar, bass, sad, dark
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Lyrics

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[Intro]

कुछ ज़ख्म दिखाई नहीं देते…

बस महसूस होते हैं।

लोग पूछते हैं—“ठीक हो?”

और हम मुस्कुराकर कहते हैं…

“हाँ, बिल्कुल।”

मगर सच ये है…

कुछ दर्द ठीक नहीं होते,

बस उनके साथ जीना आ जाता है।

[Verse 1]

चेहरे पे हँसी, आँखों में नमी रखता हूँ,

मैं अपने दर्द को सबसे छुपा के रखता हूँ।

लोगों को लगता है मेरी जिंदगी आसान है,

किसे बताऊँ हर खुशी के पीछे एक तूफ़ान है।

सुबह उठता हूँ तो चेहरे पे वही नकाब,

रात होते ही दिल करता है खुद से हिसाब।

दिन गुजर जाता है लोगों के बीच हँसते हुए,

रात पूछती है—“कितना और जिएगा ऐसे?”

मेरे कमरे की दीवारें मेरा हाल जानती हैं,

मेरी खामोशियाँ मेरी बात मानती हैं।

मैंने दर्द को कभी बाज़ार में रखा नहीं,

क्योंकि हर कोई अपना हो, ये ज़रूरी तो नहीं।

कुछ अपने थे, मगर वक्त के साथ दूर हुए,

कुछ वादे थे जो बिना आवाज़ के चूर हुए।

मैंने रिश्तों को दिल से निभाया था मगर,

लोग मतलब खत्म होते ही बदल गए अक्सर।

[Chorus]

ये ज़ख्म… अभी भरे नहीं,

हम टूटे हैं मगर बिखरे नहीं।

जो खो गया, उसे ढूँढते नहीं,

जो दर्द मिला, उससे भागते नहीं।

हाँ, आँखें आज भी नम होती हैं,

कुछ रातें अब भी कम होती नहीं।

मगर जिंदगी रुकती नहीं…

ये ज़ख्म हैं…

मगर हम मरते नहीं।

[Verse 2]

एक दोस्त था, कहता था—“भाई, हमेशा साथ हूँ,”

मुश्किल आई तो पता चला मैं कितना अकेला हूँ।

एक रिश्ता था, कहता था—“तू मेरी जान है,”

वक्त बदला तो वही रिश्ता अनजान है।

मैंने कभी हिसाब नहीं रखा रिश्तों में,

कौन कितना साथ था मेरी मुश्किलों में।

बस दिल से निभाता रहा हर एक किरदार,

और बदले में मिलता रहा इंतज़ार।

कभी पैसों की कमी ने रिश्ते दिखा दिए,

कभी वक्त ने चेहरे असली बना दिए।

जो मेरे साथ थे मेरी कामयाबी के पहले,

उनमें से कुछ ही बचे मेरे बुरे वक्त के बाद।

तब समझ आया—

भीड़ में खड़ा होना आसान है,

लेकिन गिरते वक्त हाथ पकड़ने वाला

बहुत कम होता है।

[Hook]

ये ज़ख्म… अभी भरे नहीं,

हम टूटे हैं मगर बिखरे नहीं।

जो खो गया, उसे ढूँढते नहीं,

जो दर्द मिला, उससे भागते नहीं।

हाँ, आँखें आज भी नम होती हैं,

कुछ रातें अब भी कम होती नहीं।

मगर जिंदगी रुकती नहीं…

ये ज़ख्म हैं…

मगर हम मरते नहीं।

[Verse 3]

अब भरोसा करने से पहले सोचता हूँ,

किसी को अपना कहने से पहले रुकता हूँ।

क्योंकि मैंने देखा है बदलते हुए लोग,

चेहरे वही रहते हैं, बदल जाते हैं सोच।

जिसे अपना समझा, वही दूर निकल गया,

जिसे सच बताया, वही मशहूर कर गया।

मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी समझा,

मैं चुप था इसलिए हर किसी ने मुझे हल्का समझा।

लेकिन अब मैं पहले जैसा नहीं,

हर बात पे टूट जाने वाला वैस

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