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Bass Meets Bhakti
Orchestral

Bass Meets Bhakti

K
Kj
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Style: Heavy bass, Orchestral, indian devotional traditional music , male vocal, piano, guitar, drums, aggressive, peaceful

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Lyrics

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श्री गुरु चरण सरोज राज

निज मनु मुकुर सुधारी

बरनौ रघुवर बिमल

जसु जो दायक फल चारी

बुधीहीन तनु जानिके

सुमिरो पवन कुमार

बल बुद्धि विद्या देहो

मोही हरहु कलेश विकार

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय कपीस तिहुं लोक उजागर

राम दूत अतुलित बल धामा

अंजनि पुत्र पवन सुत नामा

महाबीर विक्रम बजरंगी

कुमति निवार सुमति के संगी

कंचन वरन विराज सुबेसा

कानन कुंडल कुंचित केशा

हाथ वज्र और ध्वजा विराजे

कांधे मूंज जनेऊ साजे

संकर सुवन केसरी नंदन

तेज प्रताप महा जग वंदन

विद्यावान गुनी अति चातुर

राम काज करिबे को आतुर

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया

राम लखन सीता मन बसिया

सूक्ष्म रूप धरी सियहि दिखावा

विकट रूप धरी लंक जलावा

भीम रूप धरी असुर संहारे

रामचंद्र के काज संवारे

लाये संजीवन लखन जियाये

श्री रघुवीर हरषि उर लाये

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई

तुम मम प्रिय भारत हि सम भाई

सहस बदन तुम्हारो यश गावे

अस कहि श्रीपति कंठ लगावे

संकाधिक ब्रह्मादि मुनीसा

नारद सारद सहित अहीसा

यम कुबेर दिक्पाल जहां ते

कवि कोविद कहि सके कहां ते

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा

राम मिलाये राजपद दीन्हा

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना

लंकेश्वर भये सब जग जाना

युग सहस्र योजन पर भानु

लील्यो ताहि मधुर फल जानू

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मही

जलधि लंघि गये अचरज नहीं

दुर्गम काज जगत के जेते

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते

राम दुआरे तुम रखवारे

होत न आज्ञा बिनु पैसारे

सब सुख लहै तुम्हारी सरना

तुम रक्षक काहु को डरना

आपन तेज सम्हारो आपै

तीनों लोक हांक ते कंपै

भूत पिशाच निकट नहीं आवै

महावीर जब नाम सुनावै

नासे रोग हरै सब पीरा

जपत निरंतर हनुमत बीरा

संकट से हनुमान छुड़ावै

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै

सब पर राम तपस्वी राजा

तिन के काज सकल तुम साजा

और मनोरथ जो कोई लावै

सोइ अमित जीवन फल पावै

चारों जुग परताप तुम्हारा

है परसिद्ध जगत उजियारा

साधु संत के तुम रखवारे

असुर निकंदन राम दुलारे

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता

अस वर दीन जानकी माता

राम रसायन तुम्हारे पासा

सदा रहो रघुपति के दासा

तुम्हारे भजन राम को पावै

जनम जनम के दुख बिसरावै

अंतकाल रघुवर पुर जायी

जहां जनम हरि भक्त कहायी

और देवता चित्त न धरहीं

हनुमत सेइ सर्व सुख करहीं

संकट कटे मिटे सब पीरा

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा

जय जय जय हनुमान गोसाईं

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं

जो शत बार पाठ करे कोई

छूटहिं बंदि महा सुख होई

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा

होय सिद्धि साखी गौरीसा

तुलसीदास सदा हरि चेरा

कीजै नाथ हृदय महं डेरा

पवन तनय संकट हरना

मंगल मूरति रूप

राम लखन सीता सहित

हृदय बसहु सूर भूप

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