
Cycle Wali Gali
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"वो ट्यूशन वाला प्यार
[Intro]
वो भी क्या दिन थे…
जब दिल को प्यार का मतलब कहाँ पता था,
बस एक चेहरा था…
जिसे देखकर दिल मुस्कुराता था।
[Mukhda]
वो भी क्या दिन थे, जब हम ट्यूशन जाया करते थे,
उन्हें देखते थे, फिर नज़रें चुराया करते थे।
वो साइकिल लेकर निकलना, उनकी गली से गुजरना,
वो साथ चलें अगर, तो पैदल ही चलना।
[Pre]
न कोई वादा था, न कोई इकरार,
फिर भी दिल में था उनका इंतज़ार…
वो बचपन की बातें, वो मासूम सा प्यार,
वो ट्यूशन वाला प्यार… वो मीठी सी तकरार।
[Chorus]
वो ट्यूशन वाला प्यार, कहाँ खो गया,
वो बचपन का दिल, जाने कहाँ सो गया।
एक साथ बैठना, चुपके से मुस्कुराना,
अपनी पढ़ाई छोड़, उनको पढ़ाना।
वो ट्यूशन वाला प्यार…
वो मीठी सी तकरार…
आज भी याद आता है,
वो बचपन का पहला प्यार।
[Antara 1]
किताबें थीं हाथों में, नज़रें थीं उन पर,
कुछ कह नहीं पाते थे, रहते थे चुपकर।
उनकी एक हँसी पर, दिन बन जाता था,
उनका नाम आते ही, दिल धड़क जाता था।
कभी पेन के बहाने, कभी नोट्स के बहाने,
ढूँढते थे उनको, हज़ारों बहाने।
वो छोटी सी दुनिया, वो छोटे से ख्वाब,
आज भी दिल में हैं, वो सारे जवाब।
[Chorus]
वो ट्यूशन वाला प्यार, कहाँ खो गया,
वो बचपन का दिल, जाने कहाँ सो गया।
वो साइकिल की घंटी, वो गलियों का सफ़र,
वो साथ कुछ पल चलना, लगता था जैसे उम्रभर।
वो ट्यूशन वाला प्यार…
वो मीठी सी तकरार…
आज भी याद आता है,
वो बचपन का पहला प्यार।
[Bridge]
कहाँ गए वो दिन, कहाँ वो शामें,
कहाँ गईं वो मासूम सी बातें।
आज सब कुछ है, मगर वो बात नहीं,
पास हैं दुनिया… मगर वो साथ नहीं।
काश एक दिन फिर, वो वक़्त लौट आए,
वो साइकिल, वो गली, वो ट्यूशन मिल जाए।
फिर से मैं बैठूँ उनके पास,
और दिल कहे धीरे से—
“रुक जा… ये पल जाने न पाए।”
[Outro]
वो भी क्या दिन थे…
जब इश्क़ बहुत मासूम हुआ करता था,
एक झलक के लिए दिल बेकरार हुआ करता था।
वो ट्यूशन वाला प्यार…
वो मीठी सी तकरार…
वो बचपन के दिन…
और वो पहला प्यार…
आज भी दिल में ज़िंदा है,
बस वो इंसान नहीं…
वो ज़माना नहीं…
वो हम नहीं।"