
Grit & Sparks
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Lyrics
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[Intro]
सोलह साल गुज़रे हैं,
मगर ख्वाब नहीं गुज़रे...
दीवारें ऊँची थीं,
मगर मेरी सोच उनसे भी ऊँची थी।
[Verse 1]
हर सुबह वही घंटी, वही रास्ते पुराने,
दिल में मगर आज भी हैं सपने सुहाने।
कभी लगा ये ज़िंदगी यहीं रुक जाएगी,
मेरी उड़ान इन दीवारों में दब जाएगी।
फिर दिल ने कहा,
"तू इतना दूर आया है, अब रुकेगा क्यों?"
जो वक़्त मिला, उससे सीख बना,
जो दर्द मिला, उससे जीत बना।
[Pre]
मैं गिरा हूँ, मगर टूटा नहीं,
थका हूँ, मगर मैं रुका नहीं।
दुनिया चाहे जो भी कहे,
मैंने खुद से कहा — मैं झुकूँगा नहीं।
[Chorus]
जो सपना देखा है,
उसे छोड़ूँगा नहीं!
Football के मैदान में,
मैं दौड़ूँगा ज़रूर,
Computer की screen पे,
लिखूँगा अपना नूर।
आज अगर रास्ते मुश्किल हैं,
कल मेरा रास्ता होगा!
जो आज मुझे रोक रहा है,
कल वही मेरा किस्सा होगा!
[Verse 2]
जब गेंद मेरे पैरों में आती है,
हर चिंता कहीं दूर चली जाती है।
Ground की मिट्टी मुझे याद दिलाती है,
के ज़िंदगी गिर कर भी संभल जाती है।
हर pass में एक उम्मीद है,
हर goal में एक नई जीत है।
मैं सिर्फ game नहीं खेलता,
मैं खुद को हर रोज़ बेहतर बनाता हूँ।
[Verse 3]
रात की ख़ामोशी, screen की रोशनी,
Code की lines और आँखों में रोशनी।
एक idea आता है,
फिर दूसरा बनाता हूँ,
जो चीज़ दुनिया ने नहीं बनाई,
उसका ख्वाब सजाता हूँ।
मैं सिर्फ computer नहीं चलाता,
मैं future को design करता हूँ।
Bug आए तो सीखता हूँ,
Error आए तो फिर try करता हूँ।
Fail होना मेरा end नहीं,
Fail होना मेरी next beginning है।
[Bridge]
कभी मैं पूछता हूँ खुद से,
"आख़िर कब मिलेगी आज़ादी?"
फिर अंदर से आवाज़ आती है—
"जब तू अपने डर से आज़ाद होगा,
तभी असली आज़ादी होगी।"
Hostel ने मुझे रोका ज़रूर,
लेकिन मुझे बनाना भी सिखाया।
सोलह साल ने मुझसे बहुत कुछ लिया,
लेकिन मेरे सपने मुझसे नहीं ले सके।
[Chorus]
मेरी मंज़िल दूर सही,
मगर मैं मुड़ूँगा नहीं!
Football मेरे दिल में,
Technology मेरे हाथ में,
Innovation मेरे ख्वाबों में,
और हिम्मत मेरे साथ में!
ना दीवारें रोकेंगी,
ना मुश्किलें तोड़ेंगी,
मेरी मेहनत एक दिन
मेरी पहचान बनेगी!
[Outro]
सोलह साल का सफर...
एक बच्चा आया था,
एक ख्वाब लेकर।
और अब...
एक इंसान खड़ा है,
अपनी दुनिया बनाने के लिए।
कल क्या होगा — मुझे नहीं पता।
लेकिन एक बात ज़रूर पता है...
मैं रुकूँगा नहीं।
मैं झुकूँगा नहीं।
मैं अपने ख्वाब को
अधूरा छोड़ूँगा नहीं।