
Electric Raga
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Lyrics
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टूटे हुए ख़्वाबों के चुभन में हर एक रात ढलती गई,
सुलगती हुई सीने की आग में यह ज़िंदगी जलती गई।
जिस मोड़ पर छोड़ा था तूने हमें बेसहारा बनाकर,
उस मोड़ से आगे हमारी तन्हाई ही बस चलती गई।
आँखों के आंसुओं का अब कोई मोल न रहा,
दिल के ज़ख़्मों का ज़माने में कोई तोल न रहा।
जिन्हें रूह की धड़कन बनाकर रखा था सीने में,
आज उनके मुखौटों के पीछे कोई बोल न रहा।
हम तो राहों में बिछाते रहे सदा वफ़ा के फूल,
पर बदले में मिली सिर्फ़ तन्हाइयों की धूल।
जिन्हें खुदा मानकर पूजा था हमने रात-दिन,
उनकी मोहब्बत तो निकली बस एक हसीन भूल।
अब न किसी की आहट पर यह दिल मचलता है,
न ही किसी की याद में यह अश्क ढलता है।
ज़िंदगी ने दिए हैं ऐसे बेहिसाब ज़ख़्म,
कि अब तो दर्द में भी यह इंसान हँसकर चलता है।
वीरानियों के इस सफ़र में अब अकेले ही रहना है,
ख़ामोशी के इस ज़हर को हँसकर ही पीना है।
जब कोई साथी नहीं इस बेदर्द दुनिया में,
तो बस अपनी ही तन्हाई के साए में जीना है।
सपनों के सब आशियाने पल भर में बह गए,
हम अपनी ही दास्तान में अकेले ही रह गए।
ज़माने ने पूछा जब हमारी ख़ामोशी का सबब,
तो हम भी मुस्कुराकर चुपचाप सब सह गए।