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मन के अंधियारा
Bhajan

मन के अंधियारा

BHARTI JAINBHARTI JAIN
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Lyrics

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[Intro]

(हो...)

[Verse]

धन के पीछे दौड़ रहा है

अपनों को भी छोड़ रहा है

चार दिनों का मेला जग में

फिर भी मन क्यों जोड़ रहा है

[Verse]

आज मिला जो कल छूटेगा

किस बात का इतना अभिमान

जाग मुसाफिर राह पकड़ ले

कर ले प्रभु का गुणगान

[Chorus]

महल खड़े हों चाहे लाखों

साथ न जाएँ सोने-चाँदी

कर्मों का ही लेखा होगा

(लेखा होगा)

बाकी सारी बातें आधी

[Verse]

बारिश की बूँदें आँगन में

जैसे आँसू बहते जाएँ

मन का भारी बादल छाया

कैसे ये दिन बीत जाएँ

[Chorus]

महल खड़े हों चाहे लाखों

साथ न जाएँ सोने-चाँदी

कर्मों का ही लेखा होगा

(लेखा होगा)

बाकी सारी बातें आधी

[Bridge]

मन के अंदर दीप जला ले

मिट जाए अंधियारा सारा

प्रभु चरणों में भाव लगा ले

मिल जाएगा तुझे सहारा

[Chorus]

महल खड़े हों चाहे लाखों

साथ न जाएँ सोने-चाँदी

कर्मों का ही लेखा होगा

(कर्मों का लेखा)

बाकी सारी बातें आधी

[Outro]

(हो...)

(प्रभु का गुणगान...)

(हो...)

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