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Still Weight Of Morning
Acoustic

Still Weight Of Morning

Samarth DwivediSamarth Dwivedi
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Style: Soft music, clear male vocal with a calm serious delivery, unhurried mid-tempo pulse, fingerpicked acoustic guitar carrying the harmony with gentle piano and restrained strings, clean HD Sound Quality, transparent mix, subtle room reverb, gradual chorus lift

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Lyrics

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हम्म…

सुन ले ज़रा…

कोई बोले हिंदी में, कोई तमिल की धुन,

कोई बंगला की मिठास, कोई मराठी का जुनून।

लफ़्ज़ अलग हो सकते हैं, जज़्बात तो एक हैं,

फिर क्यों बाँट रहे ख़ुद को, हम सब तो एक हैं।

सड़कों पे, नेट पे, रोज़ यही जंग,

भाषा के नाम पे फीका पड़ता अपना रंग।

मैं पूछूँ बस इतना, सच से ना भागना,

क्या बोली ने सिखाया, या हमने सीखा बाँटना?

ना बोली ने रोका,

ना बोली ने मारा,

फिर क्यों हमने ख़ुद ही

दिल में ज़हर उतारा?

भाषा नहीं लड़ती, हम लड़ जाते हैं,

अल्फ़ाज़ नहीं, हम उन्हें भड़काते हैं।

देश एक है, आवाज़ें हज़ार,

दिल की धड़कन सबकी एक-सी यार।

भाषा नहीं लड़ती, हम लड़ जाते हैं,

नाम अलग हैं, सपने एक जैसे हैं।

जो समझे ये बात, वही आगे बढ़ता है,

नफ़रत का शोर बस दिल को तोड़ता है।

हम्म…

भाव समझ…

भाषा नहीं…

दिल को पढ़…

माँ जो लोरी गाए, जिस ज़ुबान में हो,

उसमें छुपा प्यार ही तो हर अरमान में हो।

स्कूल हो, दफ़्तर हो, सड़क या बाज़ार,

भाषा नहीं पूछती — कौन उत्तर, कौन दक्षिण, कौन यार।

जब देश पे मुश्किल आई, साथ सभी आए,

ना किसी ने नाम पूछा, ना बोली को परख पाए।

फिर अमन के दिनों में क्यों उलझने लगे?

अपनी ही पहचान से क्यों लड़ने लगे?

सम्मान माँगना सही,

ज़बरदस्ती नहीं।

अपनी बोली को जियो,

दूसरी को मिटाना नहीं।

भाषा नहीं लड़ती, हम लड़ जाते हैं,

अल्फ़ाज़ नहीं, हम उन्हें भड़काते हैं।

देश एक है, आवाज़ें हज़ार,

दिल की धड़कन सबकी एक-सी यार।

भाषा नहीं लड़ती, हम लड़ जाते हैं,

नाम अलग हैं, सपने एक जैसे हैं।

जो समझे ये बात, वही आगे बढ़ता है,

नफ़रत का शोर बस दिल को तोड़ता है।

तेरी बोली तेरा मान है,

मेरी बोली मेरी शान है।

तू अपनी भाषा दिल से बोल,

मैं अपनी को दूँ सम्मान।

रंग अनेक, रूप अनेक,

फिर भी एक पहचान,

हम सबकी आवाज़ अलग सही,

पर एक है हिंदुस्तान।

भाषा नहीं लड़ती, हम लड़ जाते हैं,

दीवारें हम ख़ुद ही खड़ी कर जाते हैं।

देश एक है, आवाज़ें हज़ार,

फिर भी दिलों में एक ही प्यार।

भाषा नहीं लड़ती, हम लड़ जाते हैं,

अलग ज़ुबानें, सपने एक जैसे हैं।

नफ़रत छोड़, इंसानियत चुन,

यही तो भारत के रिश्ते हैं।

हिंदी हो, तमिल हो, बंगला या उर्दू,

हर भाषा की अपनी एक ख़ुशबू।

बोली मेरी पहचान है,

तेरी बोली भी सम्मान है।

ज़ुबानें अलग सही,

दिल एक होना चाहिए…

भाषाएँ रहें हज़ार,

भारत एक होना चाहिए।

हम्म…

बस भाव समझ…

भाषा नहीं…

दिल को पढ़…

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