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Gokul Ke Dhamal
Devotional

Gokul Ke Dhamal

P
Pushpa Devi
0 likes1 plays8:15
Style: Energetic Braj folk devotional dhamal, traditional Gokul village celebration, fast dholak rhythm, powerful nagada and dhol, manjira and jhanjh, chang folk percussion, playful female folk chorus, lively call-and-response, festive Krishna devotional atmosphere, joyful village wedding-style celebration, catchy repeated hook, rustic Braj vocals, dancing energy, traditional Indian folk sound, not cinematic, not slow bhajan.

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Lyrics

अरी सखि नाच ले, गा ले रे, आज नंद घर बाजे बाजा रे! नंद को लल्ला कुआँ पूजन जाए, सज गयो सारा गोकुल आजा रे! अरी सखि नाच ले, गा ले रे, आज नंद घर बाजे बाजा रे! नंद को लल्ला कुआँ पूजन जाए, सज गयो सारा गोकुल आजा रे!लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! ढम-ढम ढोलक बाजै रे, छन-छन पायल बाजी! लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! नंद की गलियन नाचै गोकुल, अरी सखि! कैसी मस्ती छाई!जसोदा मैया लल्ला सजावै, पीतांबर पहरावै रे। मोर मुकुट और फूलन की माला, कजरौ नैन सजावै रे! अरी मैया धीरे कर श्रृंगार, लल्ला तो भागै जाय! मैया बोली — “ठहर जा कान्हा!” लल्ला हँस कै मुस्काय! जसोदा मैया लल्ला सजावै, पीतांबर पहरावै रे। मोर मुकुट और फूलन की माला, कजरौ नैन सजावै रे!लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! ढम-ढम ढोलक बाजै रे, छन-छन पायल बाजी! लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! नंद की गलियन नाचै गोकुल, अरी सखि! कैसी मस्ती छाई!अरी सखि देखो कान्हा को, कितनो इतराय रह्यो! मोर मुकुट को तिरछो करके, सबको हँसाय रह्यो! एक सखि बोली — “अरी कान्हा, आज कछु बदमाशी ना करियो!” कान्हा बोले — “तुम चिंता मत करो, पहले लड्डू धरियो!” अरी सखि देखो कान्हा को, कितनो इतराय रह्यो! मोर मुकुट को तिरछो करके, सबको हँसाय रह्यो!अरी घूँघट वाली नाच री, चूड़ी वाली नाच! कान्हा लल्ला के कुआँ पूजन में, आज मचा दे धूम-धाम! अरी घूँघट वाली नाच री, चूड़ी वाली नाच! कान्हा लल्ला के कुआँ पूजन में, आज मचा दे धूम-धाम!कुएँ किनारे थाल सजायो, दीपक ज्योत जगायो रे। फूलन की बरखा होने लागी, सबने मंगल गायो रे। नंदबाबा आगे-आगे चलैं, पीछे गोकुल सारी। बीच में कान्हा ठुमक-ठुमक चलैं, लागै छबि अति प्यारी! कुएँ किनारे थाल सजायो, दीपक ज्योत जगायो रे। फूलन की बरखा होने लागी, सबने मंगल गायो रे।अरी आज तो कान्हा नाचै रे! आज तो कान्हा नाचै! कुआँ पूजन के बहाने, पूरो गोकुल नाचै! अरी आज तो कान्हा नाचै रे! आज तो कान्हा नाचै! ढम-ढम ढोलक बाजै ऐसी, धरती भी झूमै नाचै!राधा आई फूलन की डलिया, लेके खड़ी मुस्काए। कान्हा देखे राधा की ओर, नैनन से बतियाए। सखियाँ बोलीं — “अरी रे कान्हा, अब पूजा भी कर ले!” कान्हा बोले — “पहले माखन, फेर जो कहो वो कर ले!” राधा आई फूलन की डलिया, लेके खड़ी मुस्काए। कान्हा देखे राधा की ओर, नैनन से बतियाए।ढम-ढम ढोलक बाजै रे, छम-छम पायल बाजै! नंद को लल्ला कुआँ पूजन करे, गोकुल झूमै आज! ढम-ढम ढोलक बाजै रे, छम-छम पायल बाजै! जसोदा मैया नाचै रे, नंदबाबा मुस्काए! राधे-राधे बोलो रे! राधे-राधे बोलो! कान्हा-कान्हा बोलो रे! कान्हा-कान्हा बोलो! नंद के लल्ला की—जय! नंद के लल्ला की—जय! जसोदा मैया की—जय! जसोदा मैया की—जय!लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! ढम-ढम ढोलक बाजै रे, छन-छन पायल बाजी! लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! नंद की गलियन नाचै गोकुल, अरी सखि! कैसी मस्ती छाई! लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! ढम-ढम ढोलक बाजै रे, छन-छन पायल बाजी! लल्ला को कुआँ पूजन है रे, आज तो धूम मची! नंद की गलियन नाचै गोकुल, अरी सखि! कैसी मस्ती छाई!अरी नाचो रे! गाओ रे! कान्हा लल्ला की जय बोलो रे! राधे-राधे! राधे-राधे!

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