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Bhakti Dhun
Devotional

Bhakti Dhun

P
Preet
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Style: Bhajan style

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Lyrics

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कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे,

जो बोया है जीवन भर में,

वही पड़ेगा खाना रे।

राम नाम की डोरी थाम ले,

मनवा क्यों भरमाना रे,

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे।

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे...

राम नाम की डोरी थाम ले,

मनवा क्यों भरमाना रे...

धन-दौलत सब यहीं रह जाएगी,

महल अटारी छूट जाएगी,

चार जनों के कंधे ऊपर,

माटी देह समाना रे।

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे,

जो बोया है जीवन भर में,

वही पड़ेगा खाना रे।

माला फेरत उम्र गंवाई,

मन की गाँठ न खुल पाई,

बाहर-बाहर दीप जलाए,

भीतर दीप जलाना रे।

भीतर दीप जलाना रे...

मन का अँधियारा मिटाना रे...

मीठे बोल किसी को दे दे,

सूखे मन में नेह भर दे,

भूखे को दो दाने दे दे,

यही खजाना पाना रे।

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे,

नेकी की पोटली बाँध ले मनवा,

यही संग में आना रे।

क्रोध की आग बुझा रे प्राणी,

लोभ न कर तू मनमानी,

जिसने तुझको श्वास दिया है,

उसका भेद न भुलाना रे।

उसका भेद न भुलाना रे...

राम बिना किसको बतलाना रे...

जात-पात के जाल में फँसा है,

अपना-पराया मन में बसा है,

एक ही ज्योति सबमें चमके,

इतना भेद समझाना रे।

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे,

सबमें एक उजाला देख रे,

मनवा भेद मिटाना रे।

आज मिला है मानव तन तुझको,

कल का भरोसा क्या है मन को,

साँझ पड़े जब राह बुलाए,

कौन यहाँ रुक पाना रे।

कौन यहाँ रुक पाना रे...

दो दिन का है ठिकाना रे...

निंदक को भी दुआ दे देना,

टूटे दिल को आस दे देना,

जिसने तुझको दुख पहुँचाया,

उसको क्षमा सिखाना रे।

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे,

मन में मैल न रखना कोई,

प्रेम का दीप जलाना रे।

कहता मन से साधु मुसाफिर,

राह कठिन है पल-पल की डगर,

सच्चे कर्म और नाम की कमाई,

बस यही साथ निभाना रे।

बस यही साथ निभाना रे...

राम नाम गुण गाना रे...

जब अंतिम साँस पुकारेगी,

दुनिया पीछे छूट जाएगी,

नहीं चलेगा मान-गुमाना,

नहीं चलेगा खजाना रे।

क्या लेकर आया था प्राणी?

खाली हाथ आया था...

क्या लेकर जाएगा प्राणी?

खाली हाथ ही जाना रे...

फिर किसकी पूँजी साथ चलेगी?

कर्म की गठरी साथ चलेगी!

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे,

जो बोया है जीवन भर में,

वही पड़ेगा खाना रे।

राम नाम की डोरी थाम ले,

मनवा क्यों भरमाना रे,

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे।

राम... राम... राम... राम...

राम नाम ही सच्चा सहारा रे...

राम... राम... राम... राम...

राम नाम ही सच्चा सहारा रे...

नेकी कर और नाम जप ले,

मन को निर्मल बनाना रे,

कर्म की गठरी साथ चलेगी,

खाली हाथ न जाना रे...

खाली हाथ न जाना रे...

राम... राम... राम...

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