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नाम का सिंदूर
Romantic

नाम का सिंदूर

Meera ShuklaMeera Shukla
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Lyrics

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(हो...)

तुम्हें कुछ यूँ सजाना था

मोहब्बत का ताज पहनाना था

तुम्हारी खूबसूरती में

अपना प्यार मिलाना था

दुनिया से छुपाकर नहीं

सबके सामने अपनाना था

मुझे बस तेरे माथे पर

अपने नाम का सिंदूर सजाना था

तेरी हँसी को छूकर ही

अपना हर दिन बनाना था

तुम्हें कुछ यूँ सजाना था

मोहब्बत का ताज पहनाना था

तेरे माथे पर सिंदूर सजाना था

(सजाना था, सजाना था)

सबके सामने तुम्हें अपनाना था

तेरे हाथों की मेहंदी में

अपनी चाहत रचानी थी

तेरी हर छोटी खुशियों को

अपनी दुनिया बनानी थी

तेरे संग सातों जन्मों का

एक रिश्ता निभाना था

तुम्हें कुछ यूँ सजाना था

मोहब्बत का ताज पहनाना था

सबके सामने तुम्हें अपनाना था

(अपनाना था, अपनाना था)

अपने नाम का सिंदूर सजाना था

तेरी यादों की चुप राहें

दिल में दीप जलाती हैं

सोचा था तेरी डोली में

अपना संसार देखूँगा

तेरी आँखों की खुशियों में

अपना हर त्योहार देखूँगा

पर किस्मत को कुछ और ही

मंजूर कराना था

तुम्हें कुछ यूँ सजाना था

मोहब्बत का ताज पहनाना था

दुनिया के सामने तुम्हें अपनाना था

(ओ मेरे, ओ मेरे)

अपने नाम का सिंदूर सजाना था

मुझे बस तेरे माथे पर

अपने नाम का सिंदूर सजाना था

(सजाना था...)

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