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Sang Saath
Devotional

Sang Saath

Pranav Kumar SinghPranav Kumar Singh
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Style: Emotional, uplifting Indian cinematic-folk fusion with warm male and expressive female vocals. Start soft and soulful around 88 BPM with Bhairavi mood, tanpura and bansuri. Gradually bring Bageshri tenderness, Yaman hope and Desh-inspired folk energy. Keep melody simple, memorable and highly singable. Female solo opening, then alternating male-female lines, gentle harmonies and both voices together in the climax. Crystal-clear Hindi pronunciation; never rush, swallow or merge words. Give every syllable space and natural breathing. Use tabla, dholak, mridang, nal, pakhawaj, kartal, jhaal, ghanta, harmonium, flute, violin, sarangi, acoustic guitar, piano, bass and soft strings. Vocals dominant. Build energy steadily. Final 30% faster at 105–115 BPM with powerful folk rhythm, layered duet vocals and joyful chorus. Do not slow down at the end. Finish with a triumphant, unforgettable duet hook.

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Lyrics

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धीरे चल, पर रुक मत जाना,

मन को फिर से समझाना।

आज कठिन है, कल आसान,

मन में रखना अपना मान।

दर्द भी जाएगा, डर भी जाएगा,

मन में विश्वास जगमगाएगा।

एक-एक दिन हिम्मत से जीना,

जीवन फिर मुस्काएगा।

जो भी मन में डर हो, कहना,

चुप रहकर मत बोझ सहना।

जो समझ न आए, पूछते जाना,

सच को समझकर कदम बढ़ाना।

दवा चले तो ध्यान से चलना,

तन की हर आवाज़ को सुनना।

जो भी बदलाव तन में आए,

समय रहते बात बताएँ।

देह थके तो आराम करेंगे,

मन थके तो बात करेंगे।

खाना, नींद और मन का ध्यान,

इनसे बढ़ता अपना बल।

दर्द भी जाएगा, डर भी जाएगा,

मन में विश्वास जगमगाएगा।

एक-एक दिन पार करेंगे,

जीवन फिर मुस्काएगा।

बाल गए तो क्या हुआ रे,

रूप बदला तो क्या हुआ रे।

चेहरा बदले, मन न बदले,

हौसला अपना कम न हो रे।

आँख में आँसू आएँ तो आएँ,

आँसू मन को हल्का बनाएँ।

रो लेना भी हार नहीं है,

मदद माँगना हार नहीं है।

साथ मिले तो अच्छा होगा,

न मिले तो मन अपना होगा।

कोई समझे, कोई न समझे,

अपना दीपक खुद ही जलाना।

राह कठिन हो, कदम न रुकें,

आँधी आए, हौसले न झुकें।

अकेले चलना पड़े अगर तो,

अपने भीतर राह बनाना।

खर्च बढ़े तो बात करेंगे,

मिलकर उसका हल खोजेंगे।

साधन कम हों, दिन कठिन हो,

फिर भी मन को टूटने न देंगे।

हर दिन अपनी जीत सँभालें,

छोटी खुशियाँ साथ निकालें।

आज जो थोड़ा कर पाएँ,

कल उससे आगे कदम बढ़ाएँ।

दर्द भी जाएगा, डर भी जाएगा,

मन में विश्वास जगमगाएगा।

आज कठिन है, राह कठिन है,

फिर भी सूरज आएगा।

इलाज के संग धीरज रखना,

अपने मन का भी ध्यान रखना।

खाना रखना, नींद भी रखना,

जितनी ताकत, उतना चलना।

हर छोटी जीत याद में रखना,

अपने साहस को साथ में रखना।

कल जब पीछे मुड़कर देखो,

खुद पर अपना मान भी रखना।

फिर वह दिन भी आएगा जब,

सुबह नई मुस्कान लाएगी।

थकी हुई जो देह थी अपनी,

फिर से अपनी चाल पाएगी।

पर सजग रहेंगे, भूलेंगे नहीं,

सेहत से हम दूर होंगे नहीं।

सलाह, जाँच और सावधानी,

जीवन की अपनी रखवाली।

जो सीखा है, उसको याद रखेंगे,

अपने कल को आबाद रखेंगे।

आज सँवारा जो जीवन हमने,

कल भी उसका ध्यान रखेंगे।

दर्द भी जाएगा, डर भी जाएगा,

मन में विश्वास जगमगाएगा।

सीखा हमने, जाना हमने,

जीवन का मोल समझ आएगा।

जो सीखा है, वो बाँटेंगे,

किसी की राह सँवारेंगे।

जो डरे, उसको हिम्मत देंगे,

जो थके, उसको राह दिखाएँ।

जिसे लगे कि राह नहीं है,

उससे कहना—राह यहीं है।

एक कदम तुम आगे रखना,

अगला कदम फिर खुद बनता है।

हिम्मत कोई शोर नहीं है,

हिम्मत मन की रोशनी है।

गिरकर फिर से उठते जाना,

यही जिंदगी की जीत बड़ी है।

दर्द भी जाएगा, डर भी जाएगा,

मन में विश्वास जगमगाएगा।

मन में दीप जलाए रखना,

अँधियारा खुद दूर जाएगा।

जो देखा है, जो जाना है,

अनुभव से गीत बनाया है।

दिल से निकले ये सरल शब्द,

प्रणव ने मन से सजाया है।

दर्द की राह से निकली आशा,

बनकर आई मन की भाषा।

जो कुछ देखा, जो कुछ समझा,

उससे रचा ये जीवन-गान।

अब हम जागें, और जगाएँ,

अपनी सेहत का मान बढ़ाएँ।

सजग रहें और स्वस्थ रहें,

खुशियों से अपना घर भराएँ।

चल उठ मन, अब साथ चल,

आज बना ले कल से बेहतर।

थक मत जाना, रुक मत जाना,

जीवन को फिर गले लगाना।

दर्द भी गया, डर भी गया,

मन में विश्वास रह गया।

जो कुछ सहा, जो कुछ सीखा,

जीवन का एहसास रह गया।

जो रात कठिन थी, बीत गई,

जो राह कठिन थी, जीत गई।

आँखों में फिर उजियारा है,

मन में जीने का सहारा है।

जो कल था डर, आज सीख है,

जो कल था दर्द, आज जीत है।

जो कल था बोझ, आज अनुभव,

जीवन की यही सच्ची रीत है।

अब जो सीखा, भूलेंगे नहीं,

अपनी सेहत से दूर होंगे नहीं।

सजग रहेंगे, जागते रहेंगे,

अपने जीवन को थामे रहेंगे।

दर्द भी गया, डर भी गया,

मन में विश्वास रह गया।

अँधियारा था, सूरज आया,

जीवन फिर मुस्कुरा गया।

अब जो राह हमें मिली है,

उस पर औरों को भी जगाएँ।

जो डरे, उसको हिम्मत दें,

जो थके, उसको आगे बढ़ाएँ।

हमने जो कुछ सीख लिया है,

उसको आगे बाँटते जाएँ।

एक दिया जो मन में जला है,

उससे और दिए जलाएँ।

जीवन जीता, मन मुस्काया,

अँधियारा था—सूरज आया।

दर्द भी गया, डर भी गया,

विश्वास हमारा जीत गया!

विश्वास हमारा जीत गया!

जीवन फिर मुस्कुरा गया!

जीवन फिर मुस्कुरा गया!

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