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Warbeat Vow
Hard Rock

Warbeat Vow

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Lyrics

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॥ श्रीपराशक्तिस्तवः — सङ्गीतरूपम् ॥

रागः: मिश्रभैरवी | तालः: दादरा (६ मात्राः) | लयः: विलम्बितः तदनन्तरम् मध्यलयः

स्वराः: सा रे गा मा पा धा नि सा'

स्थायी: सा— रे गा | मा— गा रे | सा—

समः: सा

🌺 भूमिका — आलापः

(तानपूरायाम् सा–पा–सा धृत्वा मन्दं मन्दम्)

सा... रे गा... मा—

मा पा धा... पा मा...

गा रे सा...

सा...

(तदनन्तरम् मृदुस्वरेण)

“मा... पराशक्ति... जगन्मातः...”

(आलापस्यान्ते)

सा रे गा | मा— गा रे | सा—॥

१. प्रार्थना — करुणाया आह्वानम्

त्वं मे देवि दयाम् देहि ।

सा रे गा | मा— गा रे | सा—

त्वं मे देवि दयाम् कुरु ।

सा रे गा | मा पा मा गा | रे—

मां पालय महेशानि ।

गा मा पा | धा— पा मा | गा—

मां पालय सदाशिवे ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

२. सृष्टितत्त्वम्

त्वत्तो जातमिदम् सर्वम् ।

गा मा पा | धा पा मा | गा रे

त्वयि सर्वमिदम् जगत् ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

त्वयि लीनमिदम् सर्वम् ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

त्वमेव परमा गतिः ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

३. जगन्मातुर्वन्दना

त्वं माता शरणम् देवि ।

सा रे गा | मा पा मा गा | रे—

त्वं धात्री त्वं च पालिका ।

रे गा मा | पा धा पा मा | गा—

त्वं दात्री जगताम् माता ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा

त्वमेव मम सद्गतिः ॥

पा मा गा | रे सा रे | गा रे सा॥

४. देहमपश्चित्तार्पणम्

त्वया दत्तमिदम् देहम् ।

सा रे गा | मा— पा मा | गा रे

त्वया दत्तमिदम् मनः ।

रे गा मा | पा धा पा | मा—

त्वया दत्तमिदम् चित्तम् ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा

त्वया दत्तमिदम् वयः ॥

पा मा गा | रे सा— | सा॥

५. रक्षा मार्गप्रदर्शनस्य च प्रार्थना

मां पालय सदा देवि ।

गा मा पा | धा पा मा | गा—

मां रक्ष जननि सदा ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि—

तमो मे हर देवेशि ।

नि धा पा | मा गा रे | सा रे

मार्गम् दर्शय मे सदा ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

६. जीवशक्त्योरैक्यम्

नाहम् त्वतः पृथग्देवि ।

.नि .सा रे | गा मा गा | रे—

न त्वम् मत्तः पृथक् कदा ।

रे गा मा | पा मा गा | रे सा

जीवोऽहम् त्वयि देवेशि ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा

अहम् तव त्वमेव मे ॥

पा मा गा | रे सा रे | गा रे सा॥

७. भक्तिरद्वैतञ्च

भक्तिर्मे तव पादाब्जे ।

सा रे गा | मा पा मा | गा रे

अभेदम् ब्रह्मणो विद्धि ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

भक्तिर्मे द्वैतभावोऽस्तु ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

अद्वैतम् ब्रह्म केवलम् ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

८. देव्या बहुरूपाणि

काली दुर्गा तथा तारा ।

गा मा पा | धा धा नि | सा'—

भवानि देवि नमोऽस्तु ते ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे सा—

त्रिपुरा त्वम् महेशानि ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि—

भैरवि त्वम् नमो नमः ॥

धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

९. एका शक्तिः बहूनि रूपाणि

नानारूपधरा देवि ।

सा रे गा | मा पा धा | पा—

एकैव त्वम् सनातनि ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा

नामरूपे त्वमेवासि ।

पा मा गा | रे गा मा | पा—

बहुरूपा जगन्मयी ॥

धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे | सा॥

१०. नादबिन्दुमन्त्राः

अक्षरेषु त्वमेवासि ।

.नि .सा रे | गा मा— | गा रे

स्वरेषु त्वम् परा गतिः ।

रे गा मा | पा धा— | नि सा'

नादे त्वम् बिन्दुरूपा हि ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

मन्त्रे त्वम् शक्तिरूपिणी ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

११. कुण्डलिनी — परा ध्यानमयी

कुण्डली मूलसंस्था सा ।

.सा .रे .गा | मा— गा रे

देहोऽयम् तव मन्दिरम् ।

গা মা পা | মা গা রে | সা—

सहस्रारे परा ज्योतिः ।

गा मा पा | धा नि सा' | सा'—

हृदि त्वम् शान्तिदायिनी ॥

सा' नि धा | पा मा गा | रे सा—॥

१२. दर्शनम् पूजा च

नेत्रे दत्ते त्वया देवि ।

सा रे गा | मा पा मा | गा रे

त्वामेवाहम् विलोकये ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

पुष्पम् ददामि ते देवि ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

भक्त्या पूजाम् करोम्यहम् ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

१३. जीवनभक्त्योः प्रार्थना

जीवनम् त्वम् प्रदा देवि ।

गा मा पा | धा पा मा | गा—

जगत्त्याम् स्थानदायिनी ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि—

मां स्वकीयम् सदा धेहि ।

नि धा पा | मा गा रे | सा रे

भक्तिम् देहि पुनः पुनः ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

१४. पुनर्जन्मनि मातृस्मरणम्

यदि भूयो भवेज्जन्म ।

सा रे गा | मा पा मा | गा रे

त्वत्स्मृतिर्मे सदा भवेत् ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

यत्र यत्र भवेज्जन्म ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

तत्र त्वम् भव मे सदा ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

१५. पूर्णसमर्पणम्

न धनम् न यशो देवि ।

सा रे गा | मा पा मा | गा—

न भोगो न च मे सुखम् ।

रे गा मा | पा धा पा | मा गा

त्वत्पादे भक्तिमिच्छामि ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि—

देहि भक्तिम् पुनः पुनः ॥

धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे | सा॥

१६. मन्त्रतन्त्रसाधना

मन्त्रे तन्त्रे च पूजायाम् ।

गा मा पा | धा पा मा | गा रे

मम साधनमेव त्वम् ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

ज्ञानम् देहि परे देवि ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

भक्तिम् देहि पुनः पुनः ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

१७. अहङ्कारविसर्जनम्

अहङ्कारम् च मे देवि ।

.सा .रे गा | मा— गा | रे—

तुभ्यम् सर्वम् समर्पये ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

ममात्मा त्वयि लीनोऽस्तु ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

चित्तम् त्वयि विलीयताम् ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा॥

१८. अन्तिमा प्रार्थना

अन्तकाले मुखे नाम ।

सा... रे गा | मा—

त्वन्नामैव मुखे भवेत् ।

गा मा पा | धा नि सा' | नि—

चित्तम् त्वत्पादयोर्लीयेत् ।

नि धा पा | मा गा रे | सा—

आत्मा त्वयि विलीयताम् ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा——॥

१९. पूर्णकृतज्ञता

त्वमेव मम सर्वात्मा ।

सा रे गा | मा पा मा | गा—

कृतज्ञताम् ददामि ते ।

रे गा मा | पा धा नि | सा'—

नित्यम् देवि नमामि ते ।

सा' नि धा | पा मा गा | रे—

त्वद्भक्तिर्मे परा गतिः ॥

गा मा पा | धा नि सा' | नि धा पा | मा गा रे सा——॥

🕉️ समाप्तिमन्त्राः — ध्यानमयजपः

सा — रे — गा — मा — | पा — मा — गा — रे — | सा——

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं पराशक्त्यै नमः।

गा मा पा — | धा नि सा' — | नि धा पा मा | गा रे सा॥

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महामायायै नमः।

सा... रे गा... मा... | गा रे सा——

ॐ श्रीमात्रे नमः।

.सा —— सा —— सा॥

ॐ शिवशक्त्यैक्यरूपिण्यै नमः॥

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