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Tum Maze Karo
Classical

Tum Maze Karo

Meraj Asrar AhmedMeraj Asrar Ahmed
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Lyrics

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(हो...)

रहने दो हमको ज़ार-ओ-हज़ीं

तुम मज़े करो

हम पर रहे तंग ये ज़मीं

तुम मज़े करो

हर ऐश है तेरे क़रीं

तुम मज़े करो

तुम शाह-ए-वक़्त, ताज-नशीं

तुम मज़े करो

हम आह भरें, तुम चुप रहो

कुछ न सुनो

अश्कों का उठता शोर यहीं

तुम मज़े करो

तुम मज़े करो नहीं

तुम मज़े करो

हम दर्द में डूबे यहीं

तुम मज़े करो

(तुम मज़े करो)

हर ठोकर में अपनी ज़मीं

तुम मज़े करो

ऐश-ए-जहाँ भी तुमको मिला

तुम मज़े करो

हुस्न-ए-जहाँ का नूर लिया

तुम मज़े करो

ग़रीब-उद्-दियार डूब गया

रंजों में यूँ

नान-ए-जवीं भी दूर रही

तुम मज़े करो

तुम मज़े करो नहीं

तुम मज़े करो

हम दर्द में डूबे यहीं

तुम मज़े करो

(तुम मज़े करो)

हर ठोकर में अपनी ज़मीं

तुम मज़े करो

एक छींक पे दौड़े तबीब

क्या ही नसीब

अजल भी छू न सके तुम्हें

तुम मज़े करो

रोज़-ए-हिसाब औरों पे है

तुम मज़े करो

तुम मज़े करो नहीं

तुम मज़े करो

हम दर्द में डूबे यहीं

तुम मज़े करो

(तुम मज़े करो)

हर ठोकर में अपनी ज़मीं

तुम मज़े करो

यहाँ साहबान-ए-माल सभी

तुम मज़े करो

हम नंग-ए-जबीं रह जाएँ

(तुम मज़े करो)

तुम मज़े करो

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