
PRO & Creator Features
Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).
Audio2Audio Remix
Pro & Creator
Voice Clone
Pro & Creator
Create Variations
Creator only
Edit Sections
Creator only
Stem Separation
Creator only
Lyrics
▶ Play this song to follow along.
**शीर्षक: युग बदले, कृष्ण न बदले**
ढल गया वो स्वर्णिम सूरज,
मौन हुआ संसार...
द्वापर की वो अंतिम बेला,
बदला युग का द्वार...
कान्हा चले परमधाम को,
छोड़ गए संसार...
पर उनकी गीता की वाणी,
गूँजे बारंबार...
हे कृष्ण... हे कृष्ण...
तुम युगों के आधार...
हे कृष्ण... हे कृष्ण...
तुम ही हो पालनहार...
सूनी हुईं वो गलियाँ सारी,
मौन हुए मंदिर के द्वार,
मोरपंख की याद दिलाए,
हर पल श्याम का प्यार...
द्वारका सागर में सोई,
बदल गया संसार,
पर कान्हा का नाम न डूबा,
रहा सदा साकार...
अर्जुन की आँखों में आँसू,
हृदय में बस एक पुकार,
"हे माधव, तुम दूर गए हो,
पर हो मेरे साथ हर बार..."
फिर आकाश बदलने लगा,
समय ने करवट ली,
स्वर्णिम युग की शाम हुई,
कलियुग की भोर हुई...
युग बदले, कृष्ण न बदले,
काल बदलता जाए...
धर्म डगमग हो जाए चाहे,
कृष्ण नाम बचाए...
युग बदले, कृष्ण न बदले,
प्रेम कभी न हारे...
अंधियारे में दीप बने वो,
श्याम हमारे प्यारे...
हे कृष्ण... हे कृष्ण...
तुम शाश्वत हो...
तुम सनातन हो...
कलियुग की पहली किरण में,
बदली मानव की चाल,
लोभ बढ़ा और मोह बढ़ा,
कम होने लगा धर्म का बल...
राजमहल में अहंकार बढ़ा,
न्याय हुआ कमजोर,
सत्य खड़ा था अकेला फिर भी,
करता रहा वो जोर...
भाई-भाई से दूर हुआ,
मन में बढ़ता द्वेष,
ज्ञान की ज्योति मंद हुई तो,
छाने लगा अंधकार विशेष...
जब-जब धर्म कमजोर पड़ेगा,
कृष्ण नाम जगाएगा...
जब-जब मन में रात घिरेगी,
श्याम प्रकाश दिखाएगा...
युग बदले, कृष्ण न बदले,
काल बदलता जाए...
एक तुम्हारा नाम ही कान्हा,
भवसागर से पार लगाए...
ऋषि बैठे वन में ध्यान लगाए,
देख रहे संसार,
समय के आगे कौन ठहरे,
सबको है यह ज्ञान...
फिर भी एक दीपक जलता,
अंधियारे के बीच,
कृष्ण नाम की मधुर धुनों ने,
जग में भर दी खींच...
मंदिर की घंटी में कान्हा,
मंत्रों में भगवान,
गीता के हर शब्द में माधव,
भक्तों की हर साँस में प्राण...
हरे कृष्ण... हरे कृष्ण...
कृष्ण कृष्ण... हरे हरे...
हरे राम... हरे राम...
राम राम... हरे हरे...
समय का चक्र घूम रहा है,
युग आते और जाते हैं,
पर जो कृष्ण को हृदय में रखे,
वो कभी नहीं हारते हैं...
द्वापर गया...
कलियुग आया...
कहता है संसार...
पर हर युग के पार खड़े हैं,
मेरे नंदकुमार...
जब अधर्म बढ़ जाएगा,
जब सत्य पुकारेगा,
जब पृथ्वी का भार बढ़ेगा,
जब संसार सुधारेगा...
तब फिर एक दिव्य संकेत होगा,
आकाश में प्रकाश,
धर्म बचाने आएँगे प्रभु,
लेकर दिव्य प्रकाश...
श्वेत अश्व पर दिव्य स्वरूप,
हाथ में तेज अपार,
कल्कि बनकर आएँगे विष्णु,
करने धर्म का उद्धार...
आएगा वो समय भी एक दिन,
जब अंधकार मिटेगा,
धर्म की ज्योति फिर से जलकर,
सारा जग उजलेगा...
युग बदले, कृष्ण न बदले,
यही सनातन सत्य,
नाम तुम्हारा अमर रहेगा,
जब तक साँस और शक्ति...
न द्वापर केवल बीता है,
न कलियुग अंतिम बात,
हर युग में प्रभु साथ हमारे,
थामे भक्तों का हाथ...
तुम ही प्रेम हो,
तुम ही ज्ञान हो,
तुम ही धर्म का सार,
तुम ही गीता,
तुम ही गंगा,
तुम ही जग के आधार...
युग बदलते रहेंगे,
काल गुजरता जाएगा,
पर श्रीकृष्ण का पावन नाम,
सदा अमर कहलाएगा...
युग बदलते रहेंगे,
धर्म फिर लौट आएगा,
जब भी दुनिया राह भटकेगी,
कृष्ण मार्ग दिखाएगा...
हे कृष्ण... हे कृष्ण...
तुम युगों के आधार...
हे कृष्ण... हे कृष्ण...
तुम ही हो पालनहार...
द्वापर की वो शाम गई...
कलियुग की सुबह आई...
पर श्याम की ज्योति...
कभी न बुझी...
कृष्ण थे...
कृष्ण हैं...
कृष्ण रहेंगे...
हर युग में...
हर हृदय में...
हे कृष्ण...
हे कृष्ण...