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HemantHemant
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Style: Powerful and deeply devotional Hanuman Chalisa in Hindi/Sanskrit. Strong, soulful male lead vocal with crystal-clear pronunciation and natural melodic singing, never spoken or recited. Every line must be properly sung with expressive emotion and accurate rhythm. Begin with peaceful temple bells, shankh, tanpura and soft harmonium. Gradually add tabla, dholak, manjira and subtle flute. Use dynamic high and low notes, gentle murki and emotional pauses. Add a male devotional chorus at important sections. Build energy gradually toward the final verses for a powerful goosebumps-filled Hanuman bhakti climax. Keep vocals prominent and lyrics completely audible. No rushed words, no excessive repetition, no overpowering instruments. Professional temple/jagran recording quality, spiritual, cinematic and uplifting.

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Lyrics

[Intro] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। [Chaupai 1] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। [Chaupai 2] राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। [Chaupai 3] महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। [Chaupai 4] कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।। [Chaupai 5] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।। [Chaupai 6] शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।। [Chaupai 7] बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। [Chaupai 8] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। [Chaupai 9] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। [Chaupai 10] भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।। [Chaupai 11] लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।। [Chaupai 12] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। [Chaupai 13] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।। [Chaupai 14] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। [Chaupai 15] जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। [Chaupai 16] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। [Chaupai 17] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।। [Chaupai 18] जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। [Chaupai 19] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। [Chaupai 20] दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। [Chaupai 21] राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। [Chaupai 22] सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।। [Chaupai 23] आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। [Chaupai 24] भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। [Chaupai 25] नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।। [Chaupai 26] संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। [Chaupai 27] सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।। [Chaupai 28] और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।। [Chaupai 29] चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। [Chaupai 30] साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकन्दन राम दुलारे।। [Chaupai 31] अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। [Chaupai 32] राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। [Chaupai 33] तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।। [Chaupai 34] अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।। [Chaupai 35] और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। [Chaupai 36] संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। [Chaupai 37] जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। [Chaupai 38] जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख|| [Chaupai 39] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। [Chaupai 40] तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।। पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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