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Ghar Ki Yaad
Acoustic

Ghar Ki Yaad

R
Rose Muhammed
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Lyrics

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(हो...)

एक घर था धूप भरा

अब बस उसकी याद बची

चुप आँगन आँखों में है

मैं चुप दर्द लिए फिरूँ

माँ की आवाज़ पास थी

मिट्टी मेरी पहचान थी

फिर एक रात सब बदल गया

रास्ता ही अब घर बन गया

मेरा नाम अभी भी ज़िंदा है

मेरी रूह में मेरा घर

नूर सा एक कल भी है

(मेरा घर, मेरा घर)

मैं फिर जीना सीखूँगा

कागज़ कम थे, घाव बहुत

चेहरों पर था चुप सा डर

बचपन पीछे छूट गया

पर सपना अब भी टूट न सका

रोटी, इज़्ज़त, चैन की चाह

बस इतना सा हक़ तो था

मेरा नाम अभी भी ज़िंदा है

मेरी रूह में मेरा घर

नूर सा एक कल भी है

(मेरा घर, मेरा घर)

मैं फिर जीना सीखूँगा

रोज़ मुहम्मद ने कहा

हमारी आवाज़ सुनो ज़रा

"No More Refugee Life" में

हम भी इंसान लिखे गए

मेरा नाम अभी भी ज़िंदा है

मेरी रूह में मेरा घर

नूर सा एक कल भी है

(मेरा घर, मेरा घर)

मैं फिर जीना सीखूँगा

कल शायद आसान हो

(मेरा घर...)

मैं फिर घर सा जी लूँगा

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