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Midnight Echo
Singer-Songwriter

Midnight Echo

Usha DixitUsha Dixit
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Style: male vocal

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Lyrics

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वृंदावन में कृष्ण अपने सखाओं के साथ वन में खेल रहे थे।

चारों तरफ हरियाली थी।

गायें और बछड़े घास चर रहे थे।

सखा कृष्ण के साथ हँस रहे थे।

किसी को पता ही नहीं था…

कि कुछ ही समय बाद

वृंदावन में ऐसी घटना होने वाली है,

जिसे देखकर स्वयं देवताओं को भी आश्चर्य हो जाएगा।

कृष्ण अपने सखाओं के साथ भोजन करने बैठे।

कोई अपनी पोटली से रोटी निकाल रहा था।

कोई मक्खन लाया था।

कोई फल लेकर आया था।

और कृष्ण…

सबके साथ बैठकर ऐसे भोजन कर रहे थे,

जैसे वे कोई साधारण ग्वालबाल हों।

सखा कृष्ण को देखकर हँसने लगे।

कृष्ण भी मुस्कुराते हुए

सबके साथ हँसी-मजाक करने लगे।

तभी…

कुछ बछड़े दूर चरते-चरते

वन के दूसरे हिस्से में चले गए।

एक सखा बोला—

“कन्हैया! हमारे बछड़े दिखाई नहीं दे रहे।”

कृष्ण ने चारों तरफ देखा।

लेकिन बछड़े कहीं दिखाई नहीं दिए।

कृष्ण समझ गए…

यह कोई साधारण घटना नहीं है।

उधर…

ब्रह्मा जी यह सब देख रहे थे।

उनके मन में एक प्रश्न उठा—

क्या यह सचमुच वही परम शक्ति है,

जिसकी चर्चा देवता करते हैं?

ब्रह्मा जी ने कृष्ण की परीक्षा लेने का विचार किया।

उन्होंने एक अद्भुत लीला रची।

देखते ही देखते

सारे बछड़े और कृष्ण के सखा

एक-एक करके वहाँ से अदृश्य हो गए।

लेकिन कृष्ण शांत रहे।

कृष्ण सब समझ चुके थे।

उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से

ऐसी लीला की कि वृंदावन में किसी को भी

अपने बच्चों और बछड़ों की कमी महसूस नहीं हुई।

हर माँ को अपना बच्चा वैसा ही दिखाई देता रहा।

हर गाय को अपना बछड़ा मिल गया।

और सबसे अद्भुत बात…

किसी को पता ही नहीं चला

कि यह सब कृष्ण की लीला है।

दिन बीतते गए।

महीने बीत गए।

और कृष्ण की यह लीला

सबको प्रेम और आनंद देती रही।

जब ब्रह्मा जी वापस आए…

तो उन्होंने जो देखा,

उसे देखकर वे स्वयं चकित रह गए।

जिसे वे अपनी लीला समझ रहे थे…

वही कृष्ण

अपनी अनंत शक्ति से

पूरे वृंदावन को संभाले हुए थे।

ब्रह्मा जी समझ गए—

कृष्ण को परीक्षा में डालने वाला

स्वयं ही उनकी लीला को समझ नहीं पाया।

ब्रह्मा जी कृष्ण के सामने नतमस्तक हो गए।

उनका अहंकार समाप्त हो गया।

और कृष्ण ने मुस्कुराकर

अपनी बाल लीला जारी रखी।

क्योंकि कृष्ण के लिए

यह सब कोई चमत्कार नहीं था…

यह तो उनके भक्तों के प्रेम की रक्षा थी।

लेकिन…

कृष्ण की लीलाओं का रहस्य

अभी और गहरा होने वाला था।

क्योंकि वृंदावन में कृष्ण की महिमा की खबर

अब वृंदावन की सीमाओं से बाहर निकल चुकी थी।

और दूर मथुरा में…

कंस तक भी

कृष्ण की शक्ति की खबर पहुँचने वाली थी।

अगले भाग में जानेंगे—

कृष्ण की खबर सुनकर कंस ने क्या निर्णय लिया?

🦚 भाग 9 में कहानी और भी रोचक होगी।

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