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Dil Ki Khamoshi
Ballad

Dil Ki Khamoshi

S
Sonia
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Style: Hindi Ballad Cinematic Ghazal Soulful Melancholic Emotional Male Vocals Indian Classical Bollywood Acoustic Piano Sarangi Tabla Nostalgic Poetic Slow Tempo Intimate Warm Vocals Reflective Bittersweet

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Lyrics

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कितना लिखा, कितना मिटाया,

कितना याद किया और कितना भुलाया।

इसी कशमकश में गुज़ार दी ज़िंदगी,

ना आगे बढ़ सका, ना पीछे हट पाया।

कुछ पन्ने हमने ख़ुद ही फाड़ दिए,

कुछ वक़्त ने हमसे छीन लिए,

अब हिसाब क्या करें इस ज़िंदगी का,

जो जिए वो भी उसके,

जो ना जिए... वो भी उसके।

वो ख़्वाब जो अधूरे रह गए रास्ते में,

उन्हें यादों की दीवारों पर सजाया।

कशिश थी उनमें आगे बढ़ने की मगर,

पाँव की ज़ंजीर ने हर बार गिराया।

हर मोड़ पे ख़ुद से मिले,

हर मोड़ पे ख़ुद को हारा,

मंज़िल सामने थी लेकिन,

दिल ने फिर भी क़दम ना मारा।

कुछ पन्ने हमने ख़ुद ही फाड़ दिए,

कुछ वक़्त ने हमसे छीन लिए,

अब हिसाब क्या करें इस ज़िंदगी का,

जो जिए वो भी उसके,

जो ना जिए... वो भी उसके।

चराग़ उम्मीदों के जलाए तो बहुत थे,

मगर हवाओं ने हर बार उन्हें बुझाया।

हम तो निकल पड़े थे सुकून की तलाश में,

पर दर्द ने हर मोड़ पर हमें ढूँढ पाया।

हम भागते रहे...

दर्द साथ चलता रहा...

अब ना कोई गिला है,

ना कोई शिकायत किसी से।

जो मिला, उसी को अपना नसीब बनाया।

ज़िंदगी की इस धूप-छाँव के खेल में,

हमने ख़ुद को ही खो कर,

सब कुछ पाया।

कुछ पन्ने हमने ख़ुद ही फाड़ दिए,

कुछ वक़्त ने हमसे छीन लिए,

अब हिसाब क्या करें इस ज़िंदगी का,

जो जिए वो भी उसके,

जो ना जिए... वो भी उसके।

ना कोई गिला...

ना कोई शिकायत...

जो मिला...

उसी को नसीब बनाया...

हमने ख़ुद को ही खोऽऽ कर...

सब कुछ पाया...

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