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Ganga Pukare
Devotional

Ganga Pukare

A
Avinash Kumar
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(हो...)

गंगा के किनारे मन पुकारे

भोर की बेला मन निहारे

कल-कल करती लहर सुनाएँ

पावन सुबह दीप जलाएँ

घाटों पर श्रद्धा मुस्काए

मन के सब संशय बह जाएँ

हर इक डुबकी अम्रित जैसी

सूनी सांसें हों फिर हँसती

माँ की गोदी सा यह तट है

जीवन नैया यहीं सँवरती

गंगा के किनारे मन मेरा पुकारे

बहती धारा जीवन सँवारे

गंगा के किनारे मन पुकारे

(गंगा मैया, गंगा मैया)

तेरे जल से दुख सब हारे

शाम ढले जब आरती जागे

सोने सी यह धरती लागे

हर हर गंगे गूँज उठे जब

रोम-रोम में शिव विराजे

मोक्षदायिनी मैया तुम हो

तेरी शरण में आए हम तो

झुके हुए ये नयन हमारे

भर दो ज्योति ह्रिदय के द्वारे

गंगा के किनारे मन मेरा पुकारे

बहती धारा जीवन सँवारे

गंगा के किनारे मन पुकारे

(हर हर गंगे, हर हर गंगे)

तेरे जल से दुख सब हारे

तेरी लहरों में शांति उतरे

तेरे नाम से अंधियार बिखरे

माँ तू छू ले, मन फिर निखरे

गंगा के किनारे मन मेरा पुकारे

बहती धारा जीवन सँवारे

गंगा के किनारे मन पुकारे

(गंगा मैया, हर हर गंगे)

तेरे जल से दुख सब हारे

गंगा के किनारे मन पुकारे

(गंगा मैया...)

तेरी शरण मन निहारे

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