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Bacha Kahan Aitbaar
Acoustic

Bacha Kahan Aitbaar

V
Vijay Parmar
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Lyrics

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(हो...)

ओ रे मनवा, सुन ले ज़रा

काँच सा दिल बिखर गया

जिसको जाँ समझा था तू

वही गहरा वार कर गया

रातें काली, कमरे सूने

अश्कों से तकिया भीगा

टूट के भी चुप ही रहे

दर्द को सीने में सीखा

हाथ छुड़ा के जो गए

मुड़ के कभी ना देखेंगे

मनवा तू क्यूँ रोता है

ये दुनिया तो बाज़ार है

यहाँ हर कोई अपना बनके

करता पीठ पे वार है

(रे मनवा...)

बचा कहाँ ऐतबार है

शोर बहुत है बाहर लेकिन

अंदर सन्नाटा छाया

जिसे चाहा था रूह से

वो बस झूठा सा साया

जिनको खुदा बनाया था

वो खाक में हमको फेंकेंगे

मनवा तू क्यूँ रोता है

ये दुनिया तो बाज़ार है

यहाँ हर कोई अपना बनके

करता पीठ पे वार है

(रे कबीरा...)

बचा कहाँ ऐतबार है

आँखों की नमी संभाल

इसको अपनी ताक़त कर

जो तुझे तन्हा छोड़ गए

उनको अपनी जीत दिखा

(मत रो...)

मनवा तू क्यूँ रोता है

ये दुनिया तो बाज़ार है

छोड़ दे उम्मीदें सबसे

अब तू खुद ही अपना यार है

(रे मनवा...)

बचा कहाँ ऐतबार है

मत रो रे मनवा

यहाँ कोई किसी का नहीं

(कोई नहीं...)

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