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Raag Dhyaan
Indian Classical

Raag Dhyaan

V
Vikrant Jain
0 likes1 plays4:05
Style: indian classical, sitar, tabla, tanpura, raaga, meditative, traditional, male vocal

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Lyrics

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ये तुम्हारी बड़ी-सी आँखें

ये तुम्हारी बड़ी-सी आँखें,

नायाब मोतियों की लड़ी-सी आँखें...

यूँ तो ख़ामोश रहकर मुस्कुराती हैं,

जब ख़ुश होती हैं, तो अपने पास बुलाती हैं।

समझ नहीं आता...

बस दूर से देखूँ या इनमें डूब जाऊँ,

हसरतों की सबसे ऊँची लहर की आस्तीन पकड़ूँ

और इनमें कूद जाऊँ।

महबूबा से पहली मुलाक़ात की हड़बड़ी-सी आँखें।

ज़ेहन की चौखट से कभी कुछ जज़्बात भाग निकलते होंगे,

दिल की मखमली दीवारों पर भी तो फिसलते होंगे।

थककर पकड़ लेते हैं वे भी इन पलकों का कोना,

ख़ुशी के या ग़म के—तेरे भी आँसू निकलते होंगे।

हँसते लबों के संग रोने की गड़बड़ी-सी आँखें।

सिकुड़ जाती हैं कभी शरारत में,

कभी ग़ुस्से से तमतमाती हैं।

दर्द, ख़ुशी, उम्मीद, मोहब्बत—

हर जज़्बात तेरी आँखें बतलाती हैं।

तुम्हें आदत नहीं है ज़्यादा बात करने की,

तुम्हारा सब कुछ तुम्हारी आँखें कह जाती हैं।

दिवाली की उस चमचमाती फुलझड़ी-सी आँखें।

कभी-कभी देर तक तुम्हारी आँखों की हँसी

मेरे कानों में गूँजती है।

कभी घबराती भी हैं, पर कुछ बोलती नहीं,

चुपचाप अपने अरमानों से जूझती हैं।

यूँ ही नहीं कहते इसे दिल का आईना,

ये चुपचाप रहकर बहुत कुछ पूछती हैं।

मिट्टी की सौंधी सुगंध बिखेरती,

सावन की पहली झड़ी-सी आँखें।

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