
Midnight Grit
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(ओ...)
रात ढले, शहर जगे
ढाका की रौशनी लगे
दिल में उठती आग नई
चल पड़ा हूँ आज यहीं
गलियों में काटी कई रात
जेब थी हल्की, इरादे साथ
सच था सख्त, नज़र में शान
सपनों का जलता आसमान
लोगों ने बोला, मैं चुप रहा
वक्त ने कहा, अब तू बढ़ा
शहर की धुन, ये रात जवान
सपनों के संग मेरी उड़ान
Low से High, अब रुकना नहीं
(रुकना नहीं, रुकना नहीं)
आज ज़मीन पर, कल आसमान यहीं
ढाका की राहें, भारी शोर
सिर में चलते कितने दौर
फिर भी सपना थमता नहीं
मेहनत का दरिया रुकता नहीं
माँ ने कहा, बस ठीक रहो
मैंने कहा, अब देख भी लो
शहर की धुन, ये रात जवान
सपनों के संग मेरी उड़ान
Low से High, अब रुकना नहीं
(उड़ना सही, उड़ना सही)
आज ज़मीन पर, कल आसमान यहीं
रात के बाद सवेरा है
टूटा भी दिल तो मेरा है
खुद पर यकीन, यही दवा
(यही दवा, यही दवा)
शहर की धुन, ये रात जवान
सपनों के संग मेरी उड़ान
Low से High, अब रुकना नहीं
(रुकना नहीं, रुकना नहीं)
आज अँधेरों में, कल रोशनी यहीं
ढाका मेरी जान रहे
मेरी आवाज़ उड़ान रहे
(ओ... शहर की धुन)
(ओ... मेरी उड़ान)