
Kaali Saazish
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Lyrics
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(हो...)
इस शहर में चेहरे बहुत
पीछे कितने इंसान
मैंने अब सीख लिया
पहले नज़र पहचान
हाथ मिलाकर वार हुए
मीठी बातों में सौदे
मैंने भरोसा भी दिया
अब पहले इरादे पढ़ते
मेरी मेज़ पे अपने थे
पीठ पीछे किस्से बिकते
मैंने सब सुनकर चुप रहा
ऊपर उठना बेहतर था
चेहरे बहुत हैं
पर नकाब भी बहुत हैं
जो अपने दिखते हैं
उनके हिसाब भी बहुत हैं
(चेहरे बहुत हैं)
मैंने सब देखा
अब मैं बदल गया
जिस खेल में मोहरा था
मेरी चुप्पी डर ना थी
मेरा सब्र असर ना था
मैंने बस वक्त को छोड़ा
वक्त ने मेरा नाम लिखा
जो कल मुझे गिराते थे
आज ऊँचाई गिनते हैं
मैंने राह नहीं रोकी
बस हटना छोड़ दिया
मेरे पास धोखा नहीं
खुद पे यकीन काफी
दोस्ती में सौदे देखे
दरवाज़ा अब बंद ही
तुमने मुझे बदल दिया
अब जो सामने खड़ा है
वो पहले वाला नहीं
(वो पहले वाला नहीं)
चेहरे बहुत हैं
पर नकाब भी बहुत हैं
जो अपने दिखते हैं
उनके हिसाब भी बहुत हैं
(नकाब भी बहुत हैं)
मैंने सब देखा
अब मैं बदल गया
आज वही खेल बदल गया
भरोसा अब कम सही
लेकिन नज़र तेज़ है
दिल अभी वैसा ही
(दरवाज़े बंद हैं)