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# पहला या आख़िरी
### INTRO
आज फिर उठी क़लम मेरी, लिखने को शायरी
क्या इश्क़ मेरा पहला था, या आख़िरी?
### HOOK
तुझको याद करके लिख रहा गाना ये
या बस याद करने का बहाना ये
क्या इश्क़ काग़ज़ी था, आरज़ी था
मुझको है वापस बताना ये
### VERSE 1
क्यों लिख रहा ये बताना भी ज़रूरी है,
ये बस क़लम से ना जी-हुज़ूरी है
जी-हुज़ूरी मैं उसकी करता था आठों पहर,
इश्क़ था, या बस उसे खोने का डर
जैसा वो बोली, ख़ुद को बदला मैं
बोलूँ उसको मसाइल, ख़ुद ही मसला मैं
मसला मैं या मसला वो या मसला बस हालात है
मसला ही क्या मसला है, ये ही तो बात है
मैं छोटे शहर का, उसके चेहरे पे दिल्ली की पेशानी
उसके सामने ख़ुद को रखना है बेमानी
टैगोर, फ़्लॉइड, ज़प्पा उसको मुँह-ज़बानी
मैं शायर उर्दू का, ना जानूँ मानी
उसकी आँखें ढूँढतीं समाज में सुधार है
मैं बिमारू, रोटी से ही प्यार है
प्यार तो मुझे भी हुआ उससे बेतहाशा
शुरू में लगा, उसे है ये बस तमाशा
तमाशा है तो थे तमाशबीन भी
उसको दिलाना था ख़ुद भी यक़ीन भी
धीरे-धीरे ख़ुद को ढाला मैं
पर इन चक्करों में ब्रज बदल डाला मैं
थाली बदली, बोली बदली और बदला परिवेश
घर आती मेरे तो शायद दे देता दहेज़
चौखट वो घर की, मैं जैसे मेहमा था
मुझको सब खोकर-देकर आखिर जाना था
### VERSE 2
मेहमा जैसे धूप बदल दे तासीर ही
मेहमा जैसे रूप बदल दे तस्वीर ही
मेहमा जैसे चूप बदल दे तदबीर ही
मेहमा जैसे भू-प बदल दे ज़मीर ही
मेहमा ये, मेहमा वो, मेहमा आखिर कौन है
मेहमा अगर गा रहा, तो मेहमा शायद मौन है
कौन किसके घर गया, कौन है पाहुना
कौन है चौखट भला, कौन है रहनुमा
दीमक दरवाज़े पे देती दस्तक है
शायर कोशिश करता भरसक है
दस्तक क्यों है देना जब ना कोई साँकल है
ये मेहमा सच में पूरा पागल है
आईने में किसका चेहरा कौन है झाँकता
कौन लिख रहा है ख़त, कौन है बाँछता
कौन है चला यहाँ, किसके पैरों में आबले
इश्क़ जब विचोह है तो क्यों हुए उतावले
तस्मे टूटा, आबले, भटका राह भर
ढूँढता था जिसको, वो रहा मेरी चाह भर
इश्क़ का असीर था या इश्क़ से आज़ाद था
सच मगर यही कि पूरा ज़िंदाबाद था
### OUTRO
एक पल को सब पता, एक पल को लापता
एक पल को सब नशा, एक पल को हादसा
एक पल को सब चनाब, एक पल को घड़ा
एक पल को आस्था, एक पल को आशना
एक पल को काग़ज़ी, एक पल को आरज़ी
एक पल को शाह ही, एक पल को मात भी
एक पल को रोशनी, एक पल को तामसी
एक पल को ख़्वाब ही, एक पल को आशिक़ी
एक पल ही एक घड़ी, एक पल को वो घड़ी
एक पल को इश्क़ ही, एक पल को ज़ख़्म भी
एक पल को ये सच, एक पल को झूठ ही
क्या इश्क़ मेरा पहला था या आख़िरी?