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Midnight Gravity
Rock

Midnight Gravity

surbhi bajajsurbhi bajaj
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Style: Heavy bass, male vocal, piano, guitar, drums, bass, synth

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Lyrics

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(Instrumental - Lush strings with a soft sitar melody)

शाम ढलती है तो यादों का कारवां आता है

तेरी हर बात का, अब भी यहाँ धुआं आता है

तू बड़ी शान से आई थी, एक तूफ़ान बनकर

मेरी मासूमियत को, तूने खिलौना समझा अक्सर

वो तेरा गुरूर, वो बातें तेरी तीखी छुरी सी

आज भी चुभती हैं, रूह में कहीं दबी हुई सी

शुक्रिया तेरा, रौनक प्रोस्ती, इन जख्मों के लिए

इन्हीं यादों में, अब खुद को ढूंढ लेता हूँ मैं

तूने तो मेरा हर एक पल, हर एक चीज का फायदा उठाया

पर उन मुश्किल रास्तों ने, मुझे जीना सिखाया

शुक्रिया तेरा, रौनक प्रोस्ती, इन मुश्किल यादों के लिए

Rounak prosti

खूबसूरत चेहरा था, पर नियत में वो अंधेरा था

सवालों का जाल था, और मेरा सब कुछ ही तेरा था

तूने रिश्ते को एक कारोबार सा बना दिया

मेरे जज्बातों को, तूने बाजार में सजा दिया

अकड़ तेरी ऊँची थी, आसमां से भी परे

आज भी मेरी तन्हाई में, तेरे ही साये खड़े

धोखे की स्याही से, तूने दास्तां लिखी थी

मेरी सादगी ही शायद, मेरी सबसे बड़ी खता थी

तेरी वो जिद, और वो मेरा चुप हो जाना

अब समझ आया, वो था सिर्फ मेरा टूट जाना

शुक्रिया तेरा, रौनक प्रोस्ती, इन जख्मों के लिए

इन्हीं यादों में, अब खुद को ढूंढ लेता हूँ मैं

तूने तो मेरा हर एक पल, हर एक चीज का फायदा उठाया

पर उन मुश्किल रास्तों ने, मुझे जीना सिखाया

अब शिकवा नहीं कोई, बस एक खालीपन है

तेरी दी हुई तकलीफों में, एक नया सा सुकून है

शुक्रिया... रौनक प्रोस्ती...

बस शुक्रिया।

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