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Kulhad Ki Chuski
Ambient

Kulhad Ki Chuski

Shiv KumarShiv Kumar
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Lyrics

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(हो...)

पतीले में उबली शाम

अदरक ने खोला जाम

इलायची बोली आ रे

टपरी पे जागी धाम

कॉलेज का टॉपर यार

बैकबेंचर भी तैयार

उधारी में नाम लिखा

यहीं मिला असली विचार

फ़ोन में दुनिया तेज

दिल मगर चलता स्लो

दोस्त बोले ब्रेक ले

चाय बिना आता ना ग्लो

चाय की टपरी पे सबकी नज़र

गरमा गरम चाय ठंडा सफ़र

चाय की टपरी पे क्या सीन है

(ओये होये, क्या सीन है)

एक घूँट पी ले रंगीन है

ना कोई बॉस ना कोई फ़िक्र

कुल्हड़ की चुस्की दिल का ज़िक्र

(कुल्हड़ की चुस्की, तेरा ज़िक्र)

सुनो यहाँ का सीधा राज

कटिंग में मिलता अंदाज़

पंद्रह की छोटी सी चाय

कर दे दिमाग खटाखट आज

शहर के नकली नवाब

चेहरे पे रखते नकाब

बिस्कुट डुबोके यहाँ

मिलते हैं सारे जवाब

नो झंझट बस बैठ जा

दो चुस्की में दिन सजा

टेंशन को आज भूल जा

चाय की टपरी पे सबकी नज़र

गरमा गरम चाय ठंडा सफ़र

आज की टेंशन को दूर कर

(टपरी पे आ, टपरी पे आ)

एक घूँट पी ले रंगीन है

ना कोई बॉस ना कोई फ़िक्र

चुस्की लगाओ दिल को रिफ्रेश कर

(अदरक वाली, कड़क असर)

(ढोल बजे, कुल्हड़ बजे)

(धुआँ उठे, बीट गिरे)

चाय की टपरी पे सबकी नज़र

गरमा गरम चाय ठंडा सफ़र

ज़िंदगी यहाँ थोड़ी हसीन है

(ओये होये, हसीन है)

एक घूँट पी ले रंगीन है

ना कोई बॉस ना कोई फ़िक्र

टपरी पे आओ सब ठीक इधर

(कुल्हड़ की चुस्की, दिल बेफ़िक्र)

छोटू एक कड़क और

रील बना दे इस बार

(आहा... गरम चाय...)

बीट के संग धुआँ फरार

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