
Suryast Ki Pratigya
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🎵 अर्जुन की प्रतिज्ञा — जयद्रथ वध
कुरुक्षेत्र का वो तेरहवाँ दिन था…
सूरज ढल चुका था…
लेकिन एक पिता की दुनिया में
उस दिन हमेशा के लिए अँधेरा हो गया था…
रणभूमि में पड़ा था एक वीर…
टूटा हुआ रथ… बिखरे हुए अस्त्र…
और शरीर पर अनगिनत घाव…
वो था अभिमन्यु…
अर्जुन का पुत्र…
पांडवों की आँखों का तारा…
जिसने अकेले चक्रव्यूह में प्रवेश किया था…
लेकिन वापस नहीं लौट पाया…
⸻
जब अर्जुन लौटा रणभूमि से,
चेहरे पर था युद्ध का तेज,
पर शिविर के बाहर पसरा सन्नाटा
दे रहा था अनहोनी का संदेश…
ना कहीं पुत्र की मुस्कान थी,
ना स्वागत में कोई आवाज़,
युधिष्ठिर की झुकी हुई आँखों ने
कह दिया सब… बिना किसी राज़…
अर्जुन बोला—
“कहाँ है अभिमन्यु?
क्यों आज वो सामने नहीं आया?”
कोई जवाब नहीं मिला…
बस आँसू थे…
और उस खामोशी ने
एक पिता का दिल चीर दिया…
⸻
फिर अर्जुन ने सुनी वो कहानी…
कैसे अकेला बालक
चक्रव्यूह के भीतर गया…
कैसे वीरों ने मिलकर
धर्म के सारे नियम भुला दिए…
धनुष टूटा…
रथ टूटा…
अस्त्र छूट गए हाथों से…
फिर भी अभिमन्यु लड़ता रहा…
आखिरी साँस तक…
अर्जुन की आँखों में आँसू थे…
लेकिन अगले ही पल…
आँसू अंगार बन गए… 🔥
⸻
आज एक पिता नहीं… प्रलय बोलेगा!
आज अर्जुन का क्रोध रण में डोलेगा!
सुन ले जयद्रथ, ये सूर्यास्त से पहले—
तेरा अंत मेरे गांडीव से होगा!
गांडीव उठेगा! ⚡
धरती काँपेगी! ⚡
अर्जुन की प्रतिज्ञा—
आज पूरी होगी!
⸻
अर्जुन ने आकाश की ओर देखा,
फिर कांपती धरती पर पैर जमाया…
और पूरी रणभूमि के सामने
अपनी प्रतिज्ञा सुनाया—
“यदि सूर्यास्त से पहले
जयद्रथ का वध न कर पाया मैं…”
“तो अग्नि में स्वयं को
समर्पित कर दूँगा मैं!”
क्षण भर को…
कुरुक्षेत्र शांत हो गया…
फिर दूर कहीं
शंखों की आवाज़ गूँज उठी…
क्योंकि सब जानते थे—
कल का दिन…
सिर्फ युद्ध नहीं होगा…
कल प्रलय होगा! 🔥
⸻
कौरवों ने बनाई दीवारें,
रथों की लंबी कतारें,
एक ही लक्ष्य था सबका—
रोक लो अर्जुन की तलवारें!
द्रोण खड़े थे सामने,
कर्ण भी युद्ध में तैयार,
कृपाचार्य और अश्वत्थामा,
हर दिशा से प्रहार!
लेकिन रथ पर बैठे थे माधव…
और अर्जन के हाथों में था गांडीव…
जिसके साथ हो कृष्ण स्वयं,
उसे कौन रोक पाए रणवीर?
⸻
आज एक पिता नहीं… प्रलय बोलेगा!
आज अर्जुन का क्रोध रण में डोलेगा!
सुन ले जयद्रथ, ये सूर्यास्त से पहले—
तेरा अंत मेरे गांडीव से होगा!
गांडीव उठेगा!
धरती काँपेगी!
अर्जुन की प्रतिज्ञा—
आज पूरी होगी!
⸻
सुबह से शाम तक चलता संग्राम,
हर पल मौत का नया पैगाम…
अर्जुन जहाँ से निकलता गया,
वहाँ बिखरता गया कौरवों का अभिमान!
तीर चले तो बिजली जैसे,
रथ दौड़ा तूफान समान,
हर योद्धा बस यही सोच रहा था—
कैसे रोकें इस क्रोधित अर्जुन को आज?
लेकिन समय…
धीरे-धीरे बीत रहा था…
और सूर्य…
पश्चिम की ओर झुक रहा था… 🌅
जयद्रथ दूर खड़ा मुस्काया,
सोचा आज बच जाएगा…
बस कुछ पल और…
और अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा हार जाएगा…
⸻
अर्जुन ने सूर्य की ओर देखा…
समय बहुत कम था…
क्षण भर के लिए
रणभूमि पर अंधेरा छा गया…
कौरवों ने समझा—
सूर्य अस्त हो गया!
जयद्रथ बाहर आया…
विजय की मुस्कान के साथ…
लेकिन तभी…
माधव मुस्कुराए… 🦚
⸻
माधव:
“पार्थ… देखो ध्यान से…”
“सूर्य अस्त नहीं हुआ है…”
“तुम्हारी प्रतिज्ञा का समय अभी बाकी है!”
अर्जुन की आँखों में फिर चमक आई…
उसने गांडीव उठाया…
और पूरी रणभूमि की साँसें थम गईं…
⸻
ये प्रतिज्ञा थी अर्जुन की! 🔥
ये अग्नि थी एक पिता की! 🔥
जिसे रोकने निकला था संसार—
पर राह थी उसकी विजय की!
जयद्रथ! सुन ले अंतिम बार!
अब बचना तेरे बस की बात नहीं!
गांडीव जब बोले रणभूमि में—
फिर मृत्यु भी करती इंतज़ार नहीं!
⸻
गांडीव की प्रत्यंचा तन गई! ⚡
हवा भी जैसे थम गई!
अर्जुन ने छोड़ा वो दिव्य बाण…
और…
एक ही क्षण में…
जयद्रथ का अंत हो गया! 🔥🏹
रणभूमि गूँज उठी…
शंख बजे…
धरती काँपी…
और अर्जुन ने आकाश की ओर देखा…
क्योंकि आज…
उसने सिर्फ एक शत्रु को नहीं हराया था…
आज…
एक पिता ने
अपने पुत्र के लिए
अपनी प्रतिज्ञा निभाई थी…
⸻
अभिमन्यु…
आज तुम्हारे पिता ने
अपना वचन निभा दिया…
कुरुक्षेत्र ने उस दिन देखा था—
जब एक योद्धा ने प्रतिज्ञा ली थी…
तो सूर्य भी उसका रास्ता
नहीं रोक पाया था…
गांडीव की वो गर्जना…
आज भी इतिहास में सुनाई देती है…
“अर्जुन की प्रतिज्ञा…”
“और जयद्रथ का अंत…” 🏹🔥