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Bhakti Dhara
Devotional

Bhakti Dhara

S
SANDEEP KUMAR TRIVEDI
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Style: Traditional Bhajan (Harmonium, Tabla, Manjira, Tanpura)

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Lyrics

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ ३ ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ५ ॥ संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥ ६ ॥ विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ ७ ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ ८ ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥ १० ॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ ११ ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ १२ ॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं॥ १३ ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ १५ ॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ १६ ॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ १८ ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँगि गये अचरज नाहीं॥ १९ ॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ २० ॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होंत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ २१ ॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना॥ २२ ॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ २३ ॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ २९ ॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ ३० ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता॥ ३१ ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ ३२ ॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ ३३ ॥ अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ ३४ ॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ ३५ ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ ३७ ॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ ३९ ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ४० ॥

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Bhakti Dhara by SANDEEP KUMAR TRIVEDI - AI Generated Song | Autunes