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Khamoshi Ka Saath
Bollywood

Khamoshi Ka Saath

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Lyrics

[Intro] (हो...) कभी लगता है, अब कुछ भी ज़रूरी नहीं आदमी अकेला आता है, अकेला ही जाता है बीच की इस ख़ामोशी में, ख़ुद से मिलना होता है [Verse] अब चाहतें कम सी हैं बस साँसों का घर सा है सब कुछ होकर भी दिल में एक सूना सा दरिया है भीड़ बहुत मिल जाती है पर मन फिर तन्हा रहता [Chorus] अकेला होना दर्द नहीं अब दर्द है, कोई साथ नहीं साथ होकर भी साथ न हो तब रूह बहुत चुप रोती (साथ नहीं... साथ नहीं) [Verse] इस शहर में लाखों चेहरे पर तू जैसा कोई नहीं तारों में चुप बैठा चाँद जैसे मेरा हाल वही शाम ढले तू याद आए रात मुझे सोने न दे [Chorus] अकेला होना दर्द नहीं अब दर्द है, कोई साथ नहीं साथ होकर भी साथ न हो तब रूह बहुत चुप रोती (साथ नहीं... साथ नहीं) [Bridge] तन्हाई कब से थी मेरे संग आज समझा, ये मेरी हमराज़ हर मुस्कान में एक किस्सा जिसे कोई सुनता ही नहीं [Chorus] अकेला होना दर्द नहीं अब दर्द है, कोई साथ नहीं तन्हा रहना आसान लगा पर झूठा साथ सहा नहीं (अकेला नहीं... टूटा नहीं) [Outro] अब ख़ामोशी दोस्त बनी मैं ख़ुद में घर करता हूँ (हो...) साथ नहीं... साथ नहीं

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