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Midnight Velvet
Instrumental

Midnight Velvet

Ramesh lok RaiRamesh lok Rai
0 likes2 plays6:00
Style: smooth jazz, saxophone, piano, soft drums, 100 bpm, relaxing, sophisticated

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Lyrics

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महा विशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुंदरी बाला॥ प्रलय काल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिव शंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़ कर खम्बा॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरि जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥ क्षीर सिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥ मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भागै॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ नगर कोट में तुम्हीं विराजत। तिहूँ लोक में डंका बाजत॥ शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज संहारि संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संतों पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥ अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर नारी॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट न आवें॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म मरण ताकौ छुटि जाई॥ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीन्हो॥ निशिदिन ध्यान धरें शंकर को। काहू काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥ शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो॥ आशा तृष्णा निपट सतावें। मोह मदादिक सब विनशावें॥ शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं एकचित्त तुम्हें भवानी॥ करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला॥ जब लगि जियूं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥ दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परम पद पावै॥ देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण

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