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Sanjay Shetty

Orchestral
Ashes of Dawn
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Style: cinematic, orchestral, epic, strings, brass, percussion, dramatic, emotional, piano, guitar, violin, flute, sad
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Lyrics
Intro] (Soft piano + school bell)
स्कूल की घंटी बजती है...
एक नन्हा बच्चा भारी बस्ता उठाता है...
और चुपचाप चल पड़ता है...
[Verse 1]
नन्हे से कंधों पर, सपनों का नहीं, ज़िम्मेदारियों का पहाड़ रखा है। खेलने की उम्र में, हँसने की जगह, किताबों का संसार रखा है।
माँ की उम्मीदें, पापा के अरमान, छोटे से दिल में हज़ारों तूफ़ान। चलता है मुस्कुराकर हर सुबह, पर अंदर से होता है हैरान।
[Pre-Chorus]
क्यों बचपन से ही सिखा रहे हैं, इतना भारी बोझ उठाना? क्यों फूल से नाज़ुक बच्चों को, पत्थरों सा मज़बूत बनाना?
[Chorus]
ये कैसा शिक्षा का संसार है, जहाँ बचपन ही लाचार है। बस्ता भारी... आँखें नम, सपनों में भी रहता है ग़म।
अंकों की इस अंधी दौड़ में, कितने मासूम खो जाते हैं। कुछ चुप रहते... कुछ रो पड़ते... कुछ जीते-जी मर जाते हैं।
Verse 2]
हर दिन टेस्ट, हर दिन डर, हर गलती पर मिलता है ज़हर। कोई नहीं पूछता दिल की बात, बस नंबरों की होती है बात।
छोटी-सी हार भी पहाड़ लगे, हर सपना जैसे बेकार लगे। दबाव इतना बढ़ जाता है, बच्चा खुद से ही हार जाता है।
[Bridge] (Very emotional – Piano only)
रोक लो... इन नन्हे कदमों को टूटने से। थाम लो... इन मासूम हाथों को छूटने से।
उन्हें किताबें भी दो... पर खुशियाँ भी दो। उन्हें मंज़िल भी दो... पर जीने की वजह भी दो।
Final Chorus] (Full orchestra + children's choir)
बस्ता हल्का कर दो, सपने बड़े रहने दो। बचपन को बचपन रहने दो, इन नन्हे दिलों को जीने दो।
कल का भारत इनसे है, हर मुस्कान भी इनसे है। पढ़ाई ऐसी हो... जहाँ ज़िंदगी पहले, नंबर बाद में हों।
[Outro] (Soft child voice + fading piano)
"मुझे पढ़ना है... मगर मुझे जीना भी है।"