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Midnight Crackle
Instrumental

Midnight Crackle

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Style: lo-fi hip hop, vinyl crackle, mellow, chill, 85 bpm, jazzy, relaxing, beats

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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते ।

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ॥

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते ।

त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ॥

दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते ।

शिखरिशिरोमणितुङ्गहिमालयशृङ्गनिजालयमध्यगते ॥

मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते ।

रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ॥

निजभुजदण्ड निपातितखण्डविपातितमुण्डभटाधिपते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते ।

चतुरविचारधुरीण महाशिवदूतकृत प्रमथाधिपते ॥

दुरितदुरीहदुराशयदुर्मतिदानवदूतकृतान्तमते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥

अयि शरणागतवैरिवधूवर वीरवराभयदायकरे ।

त्रिभुवनमस्तकशूलविरोधिशिरोधिकृतामलशूलकरे ॥

दुमिदुमितामर दुन्दुभिनाद महोमुखरीकृत तिग्मकरे ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥

अयि निजहुङ्कृतिमात्र निराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते ।

समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणितबीजलते ॥

शिव शिव शुम्भ निशुम्भ महाहव तर्पितभूत पिशाचरते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥

धनुरनुसङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके ।

कनकपिशङ्गपृषत्कनिषङ्गरसद्भटशृङ्ग हतावटुके ॥

कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥

सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते ।

कृतकुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ॥

धुधुकुट धुक्कुट धिन्धिमित ध्वनि धीरमृदङ्ग निनादरते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥

जय जय जप्य जये जय शब्दपरस्तुति तत्पर विश्वनुते ।

भण भण भिञ्जिमि भिङ्कृतनूपुर सिञ्जितमोहित भूतपते ॥

नटितनटार्ध नटीनटनायक नाटितनाट्य सुगानरते ।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥

अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कान्तियुते ।

श्रितरजनी रजनी रजनी रजनी रजनीकर

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