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Temple of Dawn
Classical

Temple of Dawn

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Style: classical, orchestral, strings, piano, 60 bpm, elegant, emotive, timeless, female vocal, flute, Tempo: slow to moderate, steady pulse around 70–82 BPM. Arrangement: tanpura drone, harmonium, soft tabla/dholak, restrained temple bells, occasional low strings, and a subtle devotional choir response in the climactic phrases.

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श्री गुरु चरण सरूज-रज निज मनु मुकुर सुधारी

बरनउ रहुभर बिमल यश जो दायक फल चारि

बुधी-हीन थनु जन्निकै सुमिरौ पवन कुमार

बल-बुधी विद्या देहु मोहेय हरहु कलेश विकारा

जय हनुमाना ज्ञान गुण सागर||

जय कपिस तिहलोका उजागर||

राम दूत अतुलित बल धाम|

अंजानी-पुत्र पवन सुत नाम||

महाबिर बिक्रम बजरंगी|

कुमति निवारा सुमति के संगी||

कंचना वरण विराज सुबेसा|

कानन कुंडला कुंचित केशा||

हठ वज्र और धुवजा विराजे|

कांधे मूंजे जनेहु साजे||

संकरा सुवन केसरी नंदन|

तेज प्रताप महा जग वंदन||

विद्यावान गुनी अति चतुर|

राम काज करिबे को आतुर||

प्रबु चरित्र सुनिबे-को रसिया|

राम लखन सीता मन बसिया||

सूक्ष्म रूप धरि सियाहि दिखावा|

विकट रूप धरि लंका जरावा||

भीम रूप धरि असुर संघारे|

रामचंद्र के काज संवारे||

लाये संजीवन लखन जियाये|

श्री रघुवीर हरषि उर लाये||

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई|

तुम मम प्रिय भरत-हि-सम भाई||

सहस बदन तुम्हारो जश गावे|

अस-कहि श्रीपति कंत लगावे||

संकाधिक ब्रह्मादि मुनीसा|

नारद-सरद सहित अहीसा||

जम कुबेर दिगपाल जहां ते|

कवि कोविद कहि सके कहां ते||

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा|

राम मिलाये राजपद दीन्हा||

तुम्हारो मंत्र विभीषण माना|

लंकेश्वर भये सुब जग जाना||

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु|

लील्यो ताहि मधुर फल जानु||

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मही|

जलधि लंघि गये अचरज नही||

दुर्गाम काज जगथ के जेते|

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते||

राम दुवारे तुम रखवारे|

होअत न आज्ञा बिनु पैसारे||

सुब सुख लहए तुम्हारी शरना|

तुम रक्षक काहु को डरना||

आपन तेज सम्हारो आपैए|

तीनहों लोक हांक के कांपैए||

भूत पिसाच निकट नहीं आवै|

महावीर जब नाम सुनावै||

नासे रोग हरे सब पीरा|

जपत निरंतर हनुमंत बीरा||

संकट से हनुमान छुड़ावै|

मन करम वचन ध्यान जो लावै||

सब पर राम तपस्वी राजा|

तिन के काज सकल तुम साजा||

और मनोरथ जो कोई लावै|

सोहि अमित जीवन फल पावै||

चारों युग परताप तुम्हारा|

है परसिद्ध जगत उजियारा||

साधु संत के तुम रखवारे|

असुर निकंदन राम दुल्हारे||

अष्ट-सिधि नव निधि के धाता|

अस-वर दीन जानकी माता||

राम रसायन तुम्हारे पासा|

सदा रहो रघुपति के दासा||

तुम्हारे भजन राम को पावै|

जनम-जनम के दुख बिसरावै||

अंथ-काल रघुवीर पुर जयी|

जहां जनम हरि-भक्त कहयी||

और देवता चित न धरहि|

हनुमंथ से ही सर्वे सुख करहि||

संकट कटेय-मिटेय सब पीरा|

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा||

जय जय जय हनुमान गोसाहिं|

कृपा करहु गुरुदेव की न्याहिं||

जो सत बार पाठ करे कोहि|

छुटेहि बंधि महा सुख होहि||

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा|

होय सिद्धि साखि गौरीसा||

तुलसीदास सदा हरि चेरा|

कीजै नाथ हृदये में डेरा||

पवन तनय संकट हरना|

मंगला मूरति रूप||

राम ल

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