
Shyam Smaran
PRO & Creator Features
Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).
Audio2Audio Remix
Pro & Creator
Voice Clone
Pro & Creator
Create Variations
Creator only
Edit Sections
Creator only
Stem Separation
Creator only
Lyrics
▶ Play this song to follow along.
निश्चय प्रेम प्रतिथ ते, बिनय करे सन्मान|
तेहि के करज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान||
जय हनुमंत संत हितकारी|
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी||
जन के काज विलम्भ न कीजै|
आतुर दौरि महा सुख दीजै||
जैसे कूदि सिन्धु वही पारा|
सुरसा बद्ध पैठि विस्तारा||
आगे जयी लंकिनी रोका|
मारेहु लात गई सुर लोका||
जाय विभीषण को सुख दीन्हा|
सीता निरखि परम पध लीन्हा||
बाग उजारी सिन्धु महा बोरा|
अति आतुर यम कातर तोरा||
अक्षय कुमार मारि संहारा|
लूम लपेट लंक को जारा||
लाह समान लंक जारि गई|
जय जय धुनि सुर पुर म्म्हह भई||
अब विलाम्भ केहि कारण स्वामी|
कृपा करहु उर अन्तर्यामी||
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाताह|
आतुर होय दुख हरहु निपात||
जय गिरिधर जय जय सुख-सागर|
सुर समूह समर्थ भटनागर||
Om हनु हनु हनु हनु हनुमंत हटीले|
बैरिहि मरु बज्ज्रह की किले||
गदा बज्ज्रह लै बैरिहि मारो|
महाराज प्रभु दास उबारो||
Om-कर हुंकार महा-प्रभु धावो|
बज्ज्र गदा हनु विलम्भ न लावो||
Om ह्रिम ह्रिम ह्रिम हनुमंत कपीसा|
Om Huum Huum Huum हनु अरि उर्र शिशा||
सत्य होउ हरि शपथ पाय-के|
राम-दूथ धरु मरु धाय-के||
जय जय जय हनुमंत अगाधा|
दुक्ख पावत जन केहि अपराधा||
पूजा जप जप नेम अचारा|
नहिं जानता कच्छु दास तुम्हारा||
वन उपवन, मग गिरि गृह माही|
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं||
पाय परोह कर जोरि मनवोह|
यहि अवसर अभ केहि गोहरवू||
जय अंजनि कुमार बलवंता|
शंकर सुवन वीर हनुमंता||
बदन कराल काल कुल घालक|
राम सहाय सदा प्रति-पालक||
भूत प्रेत पिशाच्या निशाचर|
अग्नि बेताल काल मरि-मर||
इन्हें मरु तोहि शपथ राम की|
राखु नाथ मरजाद नाम की||
जनकसुता हरि दास कहावोह|
ताकी शपथ विलम्भ न लावो||
जय जय जय धुनि होअथ आकाशा|
सुमिरथ होअथ दुसह दुख नाशा||
चरण शरण कर जोरि मनवोह|
यहि अवसर अभ केहि गौरवोह||
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई|
पायह परोह कर जोरि मनै||
Om च च च च चपल चलंता|
Om हनु हनु हनु हनु हनुमंता||
Om हन हन हंक देता कपि चंचल|
Om सन सन सहमि पराने खल दल||
अपने जन को तुरंतह उभारो|
सुमिरत होय आनंद हमारो||
यह बजरंग बाण जेहि मारेह|
ताहि कहो फिर कौन उबारेह||
पाठ करै बजरंग बाण की|
हनुमंत रक्षा करै प्राण की||
यह बजरंग बाण जो जापे|
तेहि ते भूत प्रेत सभ कापे||
धूप देयह अरु जापै हमेशा|
ताके तांह नहीं रहे कलेश||
प्रेम प्रतिथ-हे कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान|
तेहि के करज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान||