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Shyam Smaran
Devotional

Shyam Smaran

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Style: female vocal, melodic Indian bhajan, slow-to-moderate tempo around 76–88 BPM, peaceful yet energized, devotional rather than filmi pop. Use original Hindi lyrics and melody.

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Lyrics

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निश्चय प्रेम प्रतिथ ते, बिनय करे सन्मान|

तेहि के करज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान||

जय हनुमंत संत हितकारी|

सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी||

जन के काज विलम्भ न कीजै|

आतुर दौरि महा सुख दीजै||

जैसे कूदि सिन्धु वही पारा|

सुरसा बद्ध पैठि विस्तारा||

आगे जयी लंकिनी रोका|

मारेहु लात गई सुर लोका||

जाय विभीषण को सुख दीन्हा|

सीता निरखि परम पध लीन्हा||

बाग उजारी सिन्धु महा बोरा|

अति आतुर यम कातर तोरा||

अक्षय कुमार मारि संहारा|

लूम लपेट लंक को जारा||

लाह समान लंक जारि गई|

जय जय धुनि सुर पुर म्म्हह भई||

अब विलाम्भ केहि कारण स्वामी|

कृपा करहु उर अन्तर्यामी||

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाताह|

आतुर होय दुख हरहु निपात||

जय गिरिधर जय जय सुख-सागर|

सुर समूह समर्थ भटनागर||

Om हनु हनु हनु हनु हनुमंत हटीले|

बैरिहि मरु बज्ज्रह की किले||

गदा बज्ज्रह लै बैरिहि मारो|

महाराज प्रभु दास उबारो||

Om-कर हुंकार महा-प्रभु धावो|

बज्ज्र गदा हनु विलम्भ न लावो||

Om ह्रिम ह्रिम ह्रिम हनुमंत कपीसा|

Om Huum Huum Huum हनु अरि उर्र शिशा||

सत्य होउ हरि शपथ पाय-के|

राम-दूथ धरु मरु धाय-के||

जय जय जय हनुमंत अगाधा|

दुक्ख पावत जन केहि अपराधा||

पूजा जप जप नेम अचारा|

नहिं जानता कच्छु दास तुम्हारा||

वन उपवन, मग गिरि गृह माही|

तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं||

पाय परोह कर जोरि मनवोह|

यहि अवसर अभ केहि गोहरवू||

जय अंजनि कुमार बलवंता|

शंकर सुवन वीर हनुमंता||

बदन कराल काल कुल घालक|

राम सहाय सदा प्रति-पालक||

भूत प्रेत पिशाच्या निशाचर|

अग्नि बेताल काल मरि-मर||

इन्हें मरु तोहि शपथ राम की|

राखु नाथ मरजाद नाम की||

जनकसुता हरि दास कहावोह|

ताकी शपथ विलम्भ न लावो||

जय जय जय धुनि होअथ आकाशा|

सुमिरथ होअथ दुसह दुख नाशा||

चरण शरण कर जोरि मनवोह|

यहि अवसर अभ केहि गौरवोह||

उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई|

पायह परोह कर जोरि मनै||

Om च च च च चपल चलंता|

Om हनु हनु हनु हनु हनुमंता||

Om हन हन हंक देता कपि चंचल|

Om सन सन सहमि पराने खल दल||

अपने जन को तुरंतह उभारो|

सुमिरत होय आनंद हमारो||

यह बजरंग बाण जेहि मारेह|

ताहि कहो फिर कौन उबारेह||

पाठ करै बजरंग बाण की|

हनुमंत रक्षा करै प्राण की||

यह बजरंग बाण जो जापे|

तेहि ते भूत प्रेत सभ कापे||

धूप देयह अरु जापै हमेशा|

ताके तांह नहीं रहे कलेश||

प्रेम प्रतिथ-हे कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान|

तेहि के करज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान||

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